हरियाली तीज 2027
बुधवार, 4 अगस्त 2027 · 277 दिन बाद
हरियाली तीज सावन का स्वागत हरी चूड़ियों, पेड़ों पर पड़े झूलों और गीतों से करती है, और इस दिन महिलाएँ शिव से मिलन के लिए माँ पार्वती की लंबी तपस्या को याद करती हैं।
Hariyali Teej की पूजाएं, क्रम से
इस दिन के और मंत्र
- ऐं क्लीं सौः aim kleem sauh
- ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra
- ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः... Mritunjaya mantra
हरियाली तीज 2027: तिथि और समय
- तारीख
- बुधवार, 4 अगस्त 2027
- तिथि
- श्रावण शुक्ल द्वितीया
- द्वितीया प्रारंभ
- 3 अगस्त, सुबह 11:52
- द्वितीया समाप्त
- 4 अगस्त, सुबह 8:20
- सूर्योदय
- सुबह 5:44
- सूर्यास्त
- शाम 7:10
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
हरियाली तीज 2026: तिथि और समय
- तारीख
- शनिवार, 15 अगस्त 2026
- तिथि
- श्रावण शुक्ल तृतीया
- तृतीया प्रारंभ
- 14 अगस्त, शाम 6:47
- तृतीया समाप्त
- 15 अगस्त, शाम 5:30
- सूर्योदय
- सुबह 5:50
- सूर्यास्त
- शाम 7:00
कैसे मनाएं
- एक रात पहले मेहंदी लगाई जाती है और हरे कपड़े व हरी चूड़ियाँ पहनी जाती हैं।
- मायके से कपड़े, चूड़ियाँ, मिठाई और घेवर का सिंधारा आता है।
- पेड़ों या आँगन में झूले डाले जाते हैं और सावन के गीत गाए जाते हैं।
- शाम को शिव-पार्वती की पूजा होती है और तीज की कथा सुनी जाती है।
- घर की रीत के अनुसार व्रत रखा जाता है और पूजा के बाद खोला जाता है।
आपकी कुंडली के लिए
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Hariyali Teej के बाद आने वाले त्योहार
हरियाली तीज के बारे में
तीज की कथा श्रद्धा और लगन की है। कहा जाता है कि माँ पार्वती ने कई जन्मों तक भगवान शिव को पाने की कामना की और कठोर तप किया, तब जाकर शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। हरियाली तीज इसी मिलन का उत्सव है। सुहागिनें यह व्रत सुखी और अटूट दांपत्य की कामना से रखती हैं, और कई कुँवारी लड़कियाँ मनचाहे जीवनसाथी की आस में। इस दिन माँ पार्वती की पूजा तीज माता के रूप में होती है।
यह तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को आती है, जब बारिश से धरती हरी हो जाती है, इसीलिए इसका नाम हरियाली तीज पड़ा। इसे श्रावणी तीज भी कहते हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा में यह त्योहार खूब धूम से मनाया जाता है। जयपुर में पुराने शहर से तीज माता की सवारी निकलती है, और हरियाणा के गाँव-शहरों में जगह-जगह झूले पड़ते हैं। बारिश के मौसम की तीन तीजों में यह पहली है, इसके बाद कजरी तीज और हरतालिका तीज आती हैं।
इस दिन चारों ओर हरा रंग दिखता है: हरी साड़ियाँ और लहरिया, हरी काँच की चूड़ियाँ, और एक रात पहले रची मेहंदी। पेड़ों की डालियों पर या आँगन में झूले डाले जाते हैं, और महिलाएँ बारी-बारी झूलते हुए सावन के गीत गाती हैं। सबसे प्यारी रीत सिंधारे की है, जिसमें बेटी के मायके से कपड़े, चूड़ियाँ, मेहंदी, मिठाई और घेवर आते हैं। कई परिवारों में नई दुल्हन अपनी पहली तीज मायके में मनाती है।
बहुत सी महिलाएँ दिन भर व्रत रखती हैं, कुछ तो निर्जला भी, और शाम को मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की पूजा करके साथ बैठकर तीज की कथा सुनती हैं। इसके बाद परिवार के साथ व्रत खोला जाता है। दिन तृतीया तिथि से तय होता है, और व्रत कितना कठोर रखना है, यह हर परिवार और हर महिला अपने हिसाब से तय करती है। गर्भवती, बीमार, बुज़ुर्ग या दवा लेने वाली महिलाएँ पानी और फल लेकर भी यह व्रत रख सकती हैं।
