अक्षय तृतीया 2027
रविवार, 9 मई 2027 · 190 दिन बाद
अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। अक्षय तृतीया को ऐसा दिन माना जाता है जब की गई अच्छी शुरुआत और दिया गया दान स्थायी फल देता है।
Akshaya Tritiya की पूजाएं, क्रम से
इस दिन के और मंत्र
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये... Lakshmi mantra
- ॐ ह्रीं ज्येष्ठायै नमः om hreem jyeshthayai namah
- ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra
- ॐ क्ष्रौं नमो नरसिंहाय om kshraum namo narasimhaya
अक्षय तृतीया 2027: तिथि और समय
- तारीख
- रविवार, 9 मई 2027
- तिथि
- वैशाख शुक्ल तृतीया
- तृतीया प्रारंभ
- 8 मई, सुबह 11:43
- तृतीया समाप्त
- 9 मई, सुबह 9:04
- सूर्योदय
- सुबह 5:34
- सूर्यास्त
- शाम 7:00
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
अक्षय तृतीया 2026: तिथि और समय
- तारीख
- रविवार, 19 अप्रैल 2026
- तिथि
- वैशाख शुक्ल तृतीया
- तृतीया प्रारंभ
- 19 अप्रैल, सुबह 10:50
- तृतीया समाप्त
- 20 अप्रैल, सुबह 7:28
- सूर्योदय
- सुबह 5:51
- सूर्यास्त
- शाम 6:49
कैसे मनाएं
- सुबह विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें।
- ज़रूरतमंदों को जल, अनाज, फल, पंखे या छाते दान करें।
- गर्मी में राहगीरों, पक्षियों और पशुओं के लिए पानी रखें।
- जो अच्छा काम किसी अच्छे दिन के लिए रोक रखा हो, उसे शुरू करें।
- परिवार के साथ सादा भोजन करें और जिनकी मदद कर सकें, उन्हें याद रखें।
आपकी कुंडली के लिए
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Akshaya Tritiya के बाद आने वाले त्योहार
अक्षय तृतीया के बारे में
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को आती है, जब गर्मी शुरू हो चुकी होती है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में इसे आखा तीज कहते हैं। इसे उन गिने-चुने दिनों में गिना जाता है जो अपने आप में अच्छे माने जाते हैं, इसलिए बहुत से परिवार बिना अलग मुहूर्त देखे इस दिन नया काम, गृह प्रवेश, बुवाई की शुरुआत या विवाह करते हैं। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है।
इस दिन से कई कथाएँ जुड़ी हैं। माना जाता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की जयंती भी इसी के आसपास मनाई जाती है। सुदामा की कथा भी इस दिन याद की जाती है, जो मुट्ठी भर चिउड़ा लेकर द्वारका में अपने मित्र कृष्ण से मिलने गए थे, और कृष्ण ने उनकी छोटी-सी भेंट को बड़े प्रेम से स्वीकार किया। पुरी में इसी दिन रथयात्रा के रथों का निर्माण शुरू होता है, और वृंदावन में बांके बिहारी जी के चरण दर्शन साल में केवल इसी दिन होते हैं।
इस दिन का असली भाव दान है। गर्मी का मौसम होने से लोग वही चीज़ें देते हैं जो दूसरों को गर्मी में राहत दें: ठंडे पानी से भरे मिट्टी के घड़े, अनाज, सत्तू, फल, हाथ के पंखे, छाते और चप्पलें। कई जगह राह चलते लोगों के लिए प्याऊ लगाई जाती है, गायों और पक्षियों को दाना-पानी दिया जाता है और ज़रूरतमंदों को भोजन कराया जाता है। विष्णु और लक्ष्मी की पूजा होती है और कुछ लोग व्रत भी रखते हैं।
बहुत से परिवार परंपरा के तौर पर इस दिन थोड़ा-सा सोना या चाँदी घर लाते हैं। यह केवल एक रिवाज़ है, और पूजा और दान के साथ यह दिन अपने आप में पूरा है।
अक्षय तृतीया उस दिन मनाई जाती है जिस दिन पूर्वाह्न में तृतीया तिथि हो, और ऊपर दिया समय इसी के अनुसार है। क्या शुरू करना है और क्या दान देना है, यह हर परिवार अपने ढंग से तय करता है।
