बुद्ध पूर्णिमा 2027
गुरुवार, 20 मई 2027 · 201 दिन बाद
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख की पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध को याद करने का दिन है। दीपक, फूल, करुणा और दान से भरा यह शांत दिन बौद्ध और बहुत से हिंदू, दोनों मनाते हैं।
Buddha Purnima की पूजाएं, क्रम से
इस दिन के और मंत्र
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय... Chandra mantra
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये... Lakshmi mantra
- ॐ ह्रीं ज्येष्ठायै नमः om hreem jyeshthayai namah
- ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra
बुद्ध पूर्णिमा 2027: तिथि और समय
- तारीख
- गुरुवार, 20 मई 2027
- तिथि
- वैशाख पूर्णिमा
- पूर्णिमा प्रारंभ
- 19 मई, शाम 4:04
- पूर्णिमा समाप्त
- 20 मई, शाम 4:29
- सूर्योदय
- सुबह 5:28
- सूर्यास्त
- शाम 7:07
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
बुद्ध पूर्णिमा 2026: तिथि और समय
- तारीख
- शुक्रवार, 1 मई 2026
- तिथि
- वैशाख पूर्णिमा
- पूर्णिमा प्रारंभ
- 30 अप्रैल, रात 9:13
- पूर्णिमा समाप्त
- 1 मई, रात 10:53
- सूर्योदय
- सुबह 5:40
- सूर्यास्त
- शाम 6:56
कैसे मनाएं
- भगवान बुद्ध की याद में दीपक जलाएँ और फूल अर्पित करें।
- किसी विहार या मंदिर जाएँ, या घर पर कुछ देर ध्यान करें।
- दिन सादा रखें, शाकाहारी भोजन करें और मीठा बोलें।
- ज़रूरतमंदों को भोजन, पानी या कपड़े दें।
- पशु-पक्षियों का ध्यान रखें और परिवार के साथ खीर बाँटें।
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Buddha Purnima के बाद आने वाले त्योहार
बुद्ध पूर्णिमा के बारे में
बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक या बुद्ध जयंती भी कहते हैं, वैशाख पूर्णिमा को आती है। बौद्ध परंपरा में यह एक पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन के तीन क्षणों से जुड़ी है: लुंबिनी में राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में उनका जन्म, बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति, और कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण।
सिद्धार्थ सुख-सुविधा में पले, पर बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु को देखकर उनका मन बदल गया और वे दुख के अंत की खोज में महल छोड़कर निकल पड़े। बरसों की साधना के बाद बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान करते हुए उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बुद्ध, यानी जागे हुए, कहलाए। उन्होंने वाराणसी के पास सारनाथ में पहला उपदेश दिया और फिर पूरा जीवन सही समझ, करुणा और सजग जीवन के मध्यम मार्ग की शिक्षा देने में लगाया।
इस दिन बौद्ध अनुयायी विहारों और मठों में जाकर फूल, मोमबत्ती और अगरबत्ती अर्पित करते हैं, धम्म की बातें सुनते हैं और पंचशील का संकल्प लेते हैं, और कई लोग दिन भर अष्टशील का पालन भी करते हैं। बोधगया का महाबोधि मंदिर, सारनाथ, कुशीनगर और लुंबिनी दुनिया भर के तीर्थयात्रियों से भर जाते हैं। घरों और विहारों को दीपकों से सजाया जाता है, और बहुत से लोग उस खीर की याद में खीर बनाते हैं जो ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ को भेंट की गई थी।
बहुत से हिंदू भी इस दिन को मानते हैं, और कुछ हिंदू परंपराओं में बुद्ध को भगवान विष्णु के अवतारों में गिना जाता है। लोग इसे सादगी से मनाते हैं: शाकाहारी भोजन, ज़रूरतमंदों को भोजन, कपड़े या पानी का दान, पशु-पक्षियों की देखभाल और कुछ समय शांत चिंतन में।
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है, जो ऊपर दी गई है। कुछ देशों में इसकी गणना थोड़ी अलग होती है, इसलिए हर समुदाय अपने कैलेंडर के अनुसार इसे मनाता है।
