गंगा दशहरा 2027
रविवार, 13 जून 2027 · 225 दिन बाद
गंगा दशहरा उस दिन की याद है जब मान्यता के अनुसार माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान किया जाता है।
Ganga Dussehra की पूजाएं, क्रम से
इस दिन के और मंत्र
- ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै... Ganga mantra
गंगा दशहरा 2027: तिथि और समय
- तारीख
- रविवार, 13 जून 2027
- तिथि
- ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
- दशमी प्रारंभ
- 13 जून, रात 2:45
- दशमी समाप्त
- 14 जून, रात 2:13
- सूर्योदय
- सुबह 5:22
- सूर्यास्त
- शाम 7:19
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
गंगा दशहरा 2026: तिथि और समय
- तारीख
- सोमवार, 25 मई 2026
- तिथि
- अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
- दशमी प्रारंभ
- 25 मई, सुबह 4:31
- दशमी समाप्त
- 26 मई, सुबह 5:12
- सूर्योदय
- सुबह 5:25
- सूर्यास्त
- शाम 7:10
कैसे मनाएं
- भोर में गंगा या किसी नदी में स्नान किया जाता है, या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाया जाता है।
- फूलों से माँ गंगा की पूजा होती है और पत्तों के दोने में दीपक जल में प्रवाहित किए जाते हैं।
- दस-दस चीज़ों का दान किया जाता है, जैसे दस फल, दस दीपक या ज़रूरतमंदों के लिए दस वस्तुएँ।
- गर्मी को देखते हुए घड़े, पंखे, सत्तू और शरबत बाँटे जाते हैं।
- शाम को घाटों पर गंगा आरती में शामिल हुआ जाता है।
आपकी कुंडली के लिए
अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Ganga Dussehra आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।
Ganga Dussehra के बाद आने वाले त्योहार
गंगा दशहरा के बारे में
यह कथा धैर्य और तप की है। राजा भगीरथ ने वर्षों तक तपस्या की ताकि स्वर्ग की नदी गंगा धरती पर आएँ और उनके पूर्वजों, राजा सगर के पुत्रों, की आत्माओं को शांति मिले। गंगा का वेग इतना प्रबल था कि भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया और फिर धीरे-धीरे धाराओं में छोड़ा। इसके बाद गंगा भगीरथ के पीछे-पीछे मैदानों से होती हुई सागर तक पहुँचीं, इसीलिए उन्हें भागीरथी भी कहा जाता है। गंगा दशहरा इसी गंगा अवतरण का उत्सव है।
दशहरा शब्द को दस और हरा से जोड़कर समझा जाता है, यानी दस को हरने वाला। मान्यता है कि इस दिन का स्नान तन, वचन और मन से हुई दस तरह की भूलों को धो देता है। इसलिए इस दिन की हर रीत में दस की संख्या दिखती है: दस डुबकी, दस दीपक, दस तरह के फल या फूल, और दस-दस चीज़ों का दान। यह दिन भीषण गर्मी में आता है, इसलिए लोग घड़े, पंखे, छाते, सत्तू और शरबत बाँटते हैं, और कई जगह राहगीरों के लिए प्याऊ भी लगाए जाते हैं।
सबसे बड़ी भीड़ हरिद्वार की हर की पौड़ी, ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयागराज और गढ़मुक्तेश्वर में होती है, जहाँ लोग भोर में स्नान करते हैं और शाम की गंगा आरती से घाट रोशनी से भर जाते हैं। पत्तों के दोने में छोटे दीपक जलाकर जल में प्रवाहित किए जाते हैं। कुछ जगहों पर यह उत्सव दस दिन तक चलता है और दशमी को पूरा होता है। जो लोग गंगा से दूर रहते हैं, वे घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं और वहीं पूजा कर लेते हैं।
यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है, और आपके शहर में दशमी तिथि का समय ही तारीख तय करता है। कुछ वर्षों में जब ज्येष्ठ अधिक मास के रूप में दो बार आता है, तब गंगा दशहरा अधिक ज्येष्ठ में मनाया जाता है। ज़्यादातर वर्षों में इसके एक-दो दिन बाद निर्जला एकादशी आती है, इसलिए बहुत से परिवार दोनों दिनों की तैयारी साथ करते हैं।
