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व्रत · Jyeshtha Shukla Ekadashi

निर्जला एकादशी 2027

सोमवार, 14 जून 2027 · 226 दिन बाद

Vishnuव्रतपूरे भारत में

निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आती है। यह अकेली एकादशी है जिसमें सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक बिना पानी के रहने का नियम है।

Parana muhuratसुबह 8:14 से 10:57 बजे तक

15 जून को, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले। एकादशी 14 जून को रात 2:13 बजे से 15 जून को रात 2:09 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

Nirjala Ekadashi की पूजाएं, क्रम से

Vishnu Puja

विष्णु पूजा
Morning, after bath

Vishnu is worshipped as the one who keeps the world in order, with tulsi and yellow flowers.

क्या चाहिए
  • Vishnu idol or Shaligram
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Bathe the idol or Shaligram with panchamrit.
  2. Offer tulsi leaves and yellow flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवायom namo bhagavate vasudevaya
आरती: Om Jai Jagdish Hare

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

दीन बन्धु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Vishnu Puja

विष्णु पूजा
Morning, after bath

Vishnu is worshipped as the one who keeps the world in order, with tulsi and yellow flowers.

क्या चाहिए
  • Vishnu idol or Shaligram
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Bathe the idol or Shaligram with panchamrit.
  2. Offer tulsi leaves and yellow flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवायom namo bhagavate vasudevaya
आरती: Om Jai Jagdish Hare

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

दीन बन्धु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ क्ष्रौं नमो नरसिंहाय om kshraum namo narasimhaya

निर्जला एकादशी 2027: तिथि और समय

तारीख
सोमवार, 14 जून 2027
तिथि
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी प्रारंभ
14 जून, रात 2:13
एकादशी समाप्त
15 जून, रात 2:09
पारण (व्रत खोलने का समय)
सुबह 8:14 से 10:57 बजे तक (15 जून)
सूर्योदय
सुबह 5:22
सूर्यास्त
शाम 7:19

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

निर्जला एकादशी 2026: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 25 जून 2026
तिथि
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी प्रारंभ
24 जून, शाम 6:13
एकादशी समाप्त
25 जून, रात 8:10
पारण (व्रत खोलने का समय)
सुबह 5:25 से 8:12 बजे तक (26 जून)
सूर्योदय
सुबह 5:24
सूर्यास्त
शाम 7:22

कैसे मनाएं

  1. दशमी की शाम हल्का, सादा भोजन करें।
  2. एकादशी के सूर्योदय से बिना अन्न और जल के रहें, या सेहत और उम्र के अनुसार हल्का व्रत रखें।
  3. तुलसी दल, फूल और दीप से विष्णु की पूजा करें और हो सके तो रात में भजन करें।
  4. गर्मी में लोगों को पानी, मटके, पंखे या फल दान करें।
  5. द्वादशी की सुबह हरि वासर के बाद, ऊपर दिए पारण समय में पहले जल लेकर व्रत खोलें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Nirjala Ekadashi आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Nirjala Ekadashi के बाद आने वाले त्योहार

निर्जला एकादशी के बारे में

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो साल की सबसे तेज़ गर्मी में आती है। निर्जला का अर्थ है बिना जल के, और यही इसे बाकी सब एकादशियों से अलग करता है। जो इसे पूरे नियम से रखते हैं, वे एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक न अन्न लेते हैं, न पानी। इसे साल की सबसे कठिन एकादशी माना जाता है। इसी कारण यह सबसे सम्मानित एकादशियों में गिनी जाती है।

इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी इसलिए कहते हैं क्योंकि इससे भीम की कथा जुड़ी है। पाँचों पांडवों में सबसे बलवान भीम को भूख बहुत लगती थी। उनके भाई और द्रौपदी हर एकादशी का व्रत रखते थे, पर भीम के लिए महीने में दो बार भूखा रहना संभव नहीं था। उन्होंने एक ऋषि से पूछा कि वे भी इन व्रतों का पुण्य कैसे पा सकते हैं। ऋषि ने कहा कि वे केवल ज्येष्ठ शुक्ल की एकादशी का व्रत रखें, पूरी तरह बिना अन्न और जल के। भीम ने ऐसा ही किया, और कथा कहती है कि इस एक व्रत से उन्हें साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य मिला।

भीषण गर्मी में पड़ने के कारण यह जल दान का दिन भी है। लोग मिट्टी के घड़ों में ठंडा पानी रखते हैं, राहगीरों को शरबत पिलाते हैं, और मटके, हाथ के पंखे, छाते तथा आम जैसे मौसमी फल दान करते हैं। कई शहरों में सड़कों पर प्याऊ लग जाते हैं, और अपने संयम का दिन दूसरों की सेवा का दिन बन जाता है।

दशमी की शाम हल्के भोजन के बाद व्रत शुरू होता है। विष्णु की पूजा तुलसी, फूल और दीप से होती है, और कई लोग रात भर जागकर भजन करते हैं। व्रत कितना कड़ा हो, यह हर परिवार अपने ढंग से तय करता है। जो लोग बीमार हैं, गर्भवती हैं, बुज़ुर्ग हैं या नियमित दवा लेते हैं, वे आमतौर पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार हल्का व्रत रखते हैं, जिसमें पानी, फल या दूध लिया जाता है। यह भी इस दिन को मनाने का एक जाना माना और स्वीकृत तरीका है।

अगली सुबह द्वादशी को हरि वासर समाप्त होने के बाद, इस पेज पर दिए पारण समय में व्रत खोला जाता है। ज़्यादातर लोग पहले थोड़ा पानी और कुछ हल्का लेते हैं, फिर पूरा भोजन करते हैं।