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त्योहार · Margashirsha Shukla Ekadashi

गीता जयंती 2026

रविवार, 20 दिसंबर 2026 · 50 दिन बाद

Krishnaत्योहारपूरे भारत में
Delhi · समय IST में

गीता जयंती उस दिन की याद है जब कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता सुनाई। इस दिन गीता पाठ और मनन होता है, और बहुत से लोग एकादशी का व्रत भी रखते हैं।

Gita Jayanti की पूजाएं, क्रम से

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कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा kleem krishnaya govindaya gopijanavallabhaya svaha

गीता जयंती 2026: तिथि और समय

तारीख
रविवार, 20 दिसंबर 2026
तिथि
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
एकादशी प्रारंभ
19 दिसंबर, रात 10:10
एकादशी समाप्त
20 दिसंबर, रात 8:15
सूर्योदय
सुबह 7:08
सूर्यास्त
शाम 5:28

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

गीता जयंती 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 9 दिसंबर 2027
तिथि
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
एकादशी प्रारंभ
9 दिसंबर, रात 3:00
एकादशी समाप्त
10 दिसंबर, रात 3:21
सूर्योदय
सुबह 7:01
सूर्यास्त
शाम 5:24

कैसे मनाएं

  1. श्रीकृष्ण की तस्वीर के सामने दीया जलाएँ और फूल व तुलसी चढ़ाएँ।
  2. भगवद्गीता पूरी या उसके कुछ अध्याय पढ़ें या सुनें।
  3. परिवार के साथ मिलकर पाठ करें या मंदिर के सामूहिक पाठ में शामिल हों।
  4. किसी एक श्लोक पर कुछ देर शांति से मनन करें।
  5. घर की परंपरा के अनुसार एकादशी का व्रत रखें।

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गीता जयंती के बारे में

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को आती है, जो मोक्षदा एकादशी भी है। इसलिए बहुत से लोग एकादशी का व्रत और गीता जयंती एक साथ मनाते हैं। यह उन गिने-चुने पर्वों में से है जो किसी जन्म या विजय का नहीं, बल्कि एक संवाद का उत्सव है।

कुरुक्षेत्र के मैदान में जब दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं, तब अर्जुन ने सामने अपने ही गुरुओं, बड़ों और भाइयों को देखा। दुख और दुविधा में उन्होंने अपना धनुष नीचे रख दिया। तब उनके सखा और सारथी श्रीकृष्ण ने वहीं दोनों सेनाओं के बीच उन्हें समझाया। उन्होंने फल की चिंता छोड़कर कर्तव्य निभाने, सुख-दुख में मन को स्थिर रखने, भक्ति और कभी न मिटने वाली आत्मा की बात कही। सात सौ श्लोकों और अठारह अध्यायों में संजोया गया यही उपदेश भगवद्गीता है, और यह दिन उसके पहली बार कहे जाने की याद में मनाया जाता है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में इस अवसर पर गीता महोत्सव होता है, जिसमें कई दिनों तक गीता पाठ, ब्रह्म सरोवर पर आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेला चलता है। देश भर के कृष्ण मंदिरों और आश्रमों में अठारहों अध्यायों का पाठ होता है, और बहुत से स्कूल और परिवार मिलकर चुने हुए अध्याय पढ़ते हैं।

घर पर यह दिन सादगी से मनाया जाता है: श्रीकृष्ण के सामने दीया और फूल, अकेले या परिवार के साथ गीता पढ़ना या सुनना, और किसी एक श्लोक पर कुछ देर शांति से सोचना कि वह अपने जीवन से कैसे जुड़ता है। बहुत से लोग एकादशी का व्रत भी रखते हैं, फल और दूध लेकर या बिना अन्न का एक भोजन करके। जब एकादशी दो सूर्योदयों को छूती है, तो परिवार अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग दिन व्रत रख सकते हैं, जबकि गीता पाठ ऊपर दी गई एकादशी को होता है।