करवा चौथ 2027: तिथि और समय
- तारीख
- सोमवार, 18 अक्टूबर 2027
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
- चतुर्थी प्रारंभ
- 18 अक्टूबर, शाम 5:52
- चतुर्थी समाप्त
- 19 अक्टूबर, शाम 4:43
- चंद्रोदय
- शाम 7:30
- पूजा मुहूर्त
- शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
- व्रत
- सुबह 6:23 से शाम 7:30 (चंद्रोदय) तक
- सूर्यास्त
- शाम 5:48
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
करवा चौथ के बारे में
उत्तर भारत में चलने वाले पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। इस दिन सुहागिनें सूर्योदय से पहले से लेकर चंद्रोदय तक न कुछ खाती हैं, न पानी पीती हैं। यह व्रत पति की कुशलता और सुखी दांपत्य की कामना से रखा जाता है। आजकल कई घरों में कुंवारी लड़कियां और पति भी यह व्रत रखते हैं। नाम में करवा है, यानी टोंटी वाला मिट्टी का छोटा घड़ा जो शाम की पूजा के बीच में रखा जाता है, और चौथ, यानी चतुर्थी। गर्भवती, बीमार या बुजुर्ग महिलाएं अक्सर पानी या फल लेकर व्रत रखती हैं, और यह भी पूरी श्रद्धा का ही व्रत है।
दिन की शुरुआत अंधेरे में सरगी से होती है, जो अक्सर सास भेजती या परोसती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे, फेनी और कई बार सुहाग का सामान भी होता है। इसके बाद पूरे दिन व्रत चलता है। महिलाएं शादी का जोड़ा या लाल कपड़े पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और दोपहर बाद परिवार या मोहल्ले की औरतें एक साथ बैठती हैं। करवे और थालियां लेकर गोल घेरे में बैठकर कथा सुनी जाती है, जिसमें अक्सर रानी वीरावती की श्रद्धा की कहानी होती है, और गीत गाते हुए थालियां एक हाथ से दूसरे हाथ घुमाई जाती हैं।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह त्योहार सबसे ज्यादा मनाया जाता है, और इन इलाकों के परिवार जहां भी बसे हैं, वहां इसे निभाते हैं। हर घर की रीत थोड़ी अलग होती है: कथा के बोल, सरगी में क्या रखा जाए, करवे में क्या भरा जाए और पूजा के बाद पानी लिया जाए या नहीं।
चांद निकलने पर महिला थाली में दीया रखकर छलनी से चांद देखती है, करवे से चांद को अर्घ्य देती है और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती है। पति उसे पानी का पहला घूंट पिलाकर और पहला कौर खिलाकर व्रत खुलवाते हैं। हर शहर में चांद एक ही समय पर नहीं निकलता। देश के पूर्व में वह पहले दिखता है और पश्चिम में बाद में, इसीलिए इस पेज की शहरों वाली तालिका में चंद्रोदय का समय अलग अलग है। हर परिवार अपने शहर में चांद दिखने पर ही व्रत खोलता है।
व्रत का दिन उस चतुर्थी तिथि से तय होता है जो चंद्रोदय के समय मौजूद हो। बादलों की वजह से चांद न दिखे तो परिवार अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलते हैं।