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व्रत · Kartik Krishna Chaturthi

करवा चौथ 2027

सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 · 352 दिन बाद

Parvatiव्रतNorth India

करवा चौथ सुहागिनों का वह व्रत है जो भोर की सरगी से शुरू होकर शाम को चांद दिखने पर पूरा होता है।

Karva ChauthMoonrise शाम 7:30

Puja muhurat शाम 5:48 से 7:03 बजे तक

चंद्रोदय के समय चतुर्थी; चाँद दिखने पर व्रत खोला जाता है। चतुर्थी 18 अक्टूबर को शाम 5:52 बजे से 19 अक्टूबर को शाम 4:43 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

Karva Chauth की पूजाएं, क्रम से

Ganesha Puja

गणेश पूजा
Evening, before the katha

Ganesha is honoured first so the pujas that follow begin without obstacles.

क्या चाहिए
  • Ganesha idol or picture
  • Durva grass
  • Red flowers
  • Modak or laddu
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense in front of Ganesha.
  2. Offer durva grass, red flowers and modak.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha, nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada
आरती: Jai Ganesh Deva

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

आरती के शुरुआती पद।

Shiva Puja

शिव पूजा
Evening, with Parvati, before moonrise

Shiva and Parvati are worshipped together for a long, caring marriage.

क्या चाहिए
  • Shiva lingam or picture
  • Water or Gangajal
  • Raw milk
  • Bilva leaves
  • White flowers
  • Ghee diya
विधि
  1. Pour water, then milk, slowly over the lingam.
  2. Offer bilva leaves and white flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमः शिवायom namah shivaya
आरती: Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Ganesha Puja

गणेश पूजा
Evening, before the katha

Ganesha is honoured first so the pujas that follow begin without obstacles.

क्या चाहिए
  • Ganesha idol or picture
  • Durva grass
  • Red flowers
  • Modak or laddu
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense in front of Ganesha.
  2. Offer durva grass, red flowers and modak.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha, nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada
आरती: Jai Ganesh Deva

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

आरती के शुरुआती पद।

Shiva Puja

शिव पूजा
Evening, with Parvati, before moonrise

Shiva and Parvati are worshipped together for a long, caring marriage.

क्या चाहिए
  • Shiva lingam or picture
  • Water or Gangajal
  • Raw milk
  • Bilva leaves
  • White flowers
  • Ghee diya
विधि
  1. Pour water, then milk, slowly over the lingam.
  2. Offer bilva leaves and white flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमः शिवायom namah shivaya
आरती: Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ऐं क्लीं सौः aim kleem sauh
  • ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra
  • ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः... Mritunjaya mantra
  • ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय... Chandra mantra

करवा चौथ 2027: तिथि और समय

तारीख
सोमवार, 18 अक्टूबर 2027
तिथि
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
चतुर्थी प्रारंभ
18 अक्टूबर, शाम 5:52
चतुर्थी समाप्त
19 अक्टूबर, शाम 4:43
चंद्रोदय
शाम 7:30
पूजा मुहूर्त
शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
व्रत
सुबह 6:23 से शाम 7:30 (चंद्रोदय) तक
सूर्यास्त
शाम 5:48

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

करवा चौथ 2027: हर शहर में चंद्रोदय और पूजा का समय

दिल्ली में करवा चौथ सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को है। चंद्रोदय शाम 7:30 बजे होगा; पूजा मुहूर्त शाम 5:48 से 7:03 बजे तक है।

चंद्रोदय का समय शहर के साथ बदलता है: पूर्व में पहले, पश्चिम में बाद में। हर पंक्ति उसी शहर के लिए निकाली गई है। अपना शहर खोजें या राज्य के अनुसार सूची देखें।

शहरचंद्रोदयपूजा मुहूर्त
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
पोर्ट ब्लेयरशाम 7:04शाम 4:59 से 6:12 बजे तक
अरुणाचल प्रदेश
ईटानगरशाम 6:26शाम 4:44 से 5:59 बजे तक
असम
गुवाहाटीशाम 6:36शाम 4:52 से 6:07 बजे तक
आंध्र प्रदेश
अमरावतीशाम 7:44शाम 5:45 से 6:59 बजे तक
गुंटूरशाम 7:45शाम 5:45 से 6:59 बजे तक
विजयवाड़ाशाम 7:44शाम 5:44 से 6:58 बजे तक
विशाखापत्तनमशाम 7:31शाम 5:33 से 6:47 बजे तक
उत्तर प्रदेश
अयोध्याशाम 7:14शाम 5:30 से 6:45 बजे तक
अलीगढ़शाम 7:28शाम 5:46 से 7:01 बजे तक
आगराशाम 7:30शाम 5:46 से 7:01 बजे तक
कानपुरशाम 7:22शाम 5:38 से 6:53 बजे तक
गाज़ियाबादशाम 7:29शाम 5:47 से 7:02 बजे तक
गोरखपुरशाम 7:09शाम 5:25 से 6:40 बजे तक
नोएडाशाम 7:29शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
प्रयागराजशाम 7:19शाम 5:32 से 6:47 बजे तक
बरेलीशाम 7:21शाम 5:40 से 6:55 बजे तक
मथुराशाम 7:31शाम 5:47 से 7:02 बजे तक
मुरादाबादशाम 7:23शाम 5:42 से 6:57 बजे तक
मेरठशाम 7:27शाम 5:46 से 7:02 बजे तक
लखनऊशाम 7:19शाम 5:35 से 6:50 बजे तक
वाराणसीशाम 7:14शाम 5:28 से 6:43 बजे तक
सहारनपुरशाम 7:25शाम 5:46 से 7:02 बजे तक
उत्तराखंड
देहरादूनशाम 7:22शाम 5:44 से 7:00 बजे तक
हरिद्वारशाम 7:22शाम 5:43 से 6:59 बजे तक
ओडिशा
कटकशाम 7:13शाम 5:20 से 6:34 बजे तक
भुवनेश्वरशाम 7:14शाम 5:21 से 6:35 बजे तक
कर्नाटक
बेंगलुरुरात 8:04शाम 5:59 से 7:12 बजे तक
मंगलुरुरात 8:15शाम 6:10 से 7:23 बजे तक
मैसूरुरात 8:09शाम 6:03 से 7:16 बजे तक
हुबलीरात 8:09शाम 6:07 से 7:20 बजे तक
केरल
कोच्चिरात 8:15शाम 6:06 से 7:19 बजे तक
तिरुवनंतपुरमरात 8:15शाम 6:04 से 7:16 बजे तक
गुजरात
अहमदाबादरात 8:03शाम 6:11 से 7:26 बजे तक
गांधीनगररात 8:02शाम 6:11 से 7:26 बजे तक
राजकोटरात 8:12शाम 6:19 से 7:33 बजे तक
वडोदरारात 8:02शाम 6:10 से 7:24 बजे तक
सूरतरात 8:06शाम 6:12 से 7:26 बजे तक
गोवा
पणजीरात 8:14शाम 6:12 से 7:25 बजे तक
चंडीगढ़
चंडीगढ़शाम 7:26शाम 5:48 से 7:04 बजे तक
छत्तीसगढ़
रायपुरशाम 7:29शाम 5:37 से 6:51 बजे तक
जम्मू और कश्मीर
जम्मूशाम 7:28शाम 5:54 से 7:10 बजे तक
श्रीनगरशाम 7:25शाम 5:53 से 7:09 बजे तक
झारखंड
जमशेदपुरशाम 7:07शाम 5:17 से 6:32 बजे तक
धनबादशाम 7:03शाम 5:15 से 6:30 बजे तक
रांचीशाम 7:09शाम 5:20 से 6:35 बजे तक
तमिलनाडु
कोयंबटूररात 8:10शाम 6:03 से 7:16 बजे तक
चेन्नईशाम 7:52शाम 5:48 से 7:01 बजे तक
तिरुचिरापल्लीरात 8:04शाम 5:56 से 7:09 बजे तक
मदुरैरात 8:08शाम 5:59 से 7:12 बजे तक
सेलमरात 8:04शाम 5:57 से 7:10 बजे तक
तेलंगाना
वारंगलशाम 7:45शाम 5:47 से 7:01 बजे तक
हैदराबादशाम 7:51शाम 5:52 से 7:06 बजे तक
त्रिपुरा
अगरतलाशाम 6:43शाम 4:56 से 6:11 बजे तक
दिल्ली
दिल्लीशाम 7:30शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
नागालैंड
कोहिमाशाम 6:27शाम 4:43 से 5:58 बजे तक
पंजाब
अमृतसरशाम 7:31शाम 5:55 से 7:11 बजे तक
जालंधरशाम 7:29शाम 5:53 से 7:09 बजे तक
लुधियानाशाम 7:29शाम 5:52 से 7:08 बजे तक
पश्चिम बंगाल
कोलकाताशाम 6:58शाम 5:09 से 6:23 बजे तक
सिलीगुड़ीशाम 6:48शाम 5:05 से 6:20 बजे तक
पुडुचेरी
पुडुचेरीशाम 7:57शाम 5:51 से 7:04 बजे तक
बिहार
पटनाशाम 7:05शाम 5:19 से 6:34 बजे तक
मणिपुर
इंफालशाम 6:30शाम 4:45 से 6:00 बजे तक
मध्य प्रदेश
इंदौरशाम 7:50शाम 5:59 से 7:14 बजे तक
उज्जैनशाम 7:49शाम 5:59 से 7:14 बजे तक
ग्वालियरशाम 7:32शाम 5:47 से 7:02 बजे तक
जबलपुरशाम 7:32शाम 5:42 से 6:57 बजे तक
भोपालशाम 7:42शाम 5:52 से 7:07 बजे तक
महाराष्ट्र
छत्रपति संभाजीनगरशाम 7:58शाम 6:03 से 7:17 बजे तक
ठाणेरात 8:10शाम 6:13 से 7:27 बजे तक
नागपुरशाम 7:40शाम 5:47 से 7:01 बजे तक
नासिकरात 8:05शाम 6:09 से 7:23 बजे तक
पुणेरात 8:08शाम 6:10 से 7:24 बजे तक
मुंबईरात 8:10शाम 6:13 से 7:27 बजे तक
सोलापुररात 8:01शाम 6:02 से 7:16 बजे तक
मिज़ोरम
आइज़ोलशाम 6:38शाम 4:50 से 6:05 बजे तक
मेघालय
शिलांगशाम 6:37शाम 4:52 से 6:07 बजे तक
राजस्थान
अजमेरशाम 7:46शाम 6:00 से 7:15 बजे तक
उदयपुरशाम 7:54शाम 6:06 से 7:21 बजे तक
कोटाशाम 7:44शाम 5:57 से 7:12 बजे तक
जयपुरशाम 7:40शाम 5:56 से 7:11 बजे तक
जोधपुरशाम 7:53शाम 6:07 से 7:22 बजे तक
बीकानेरशाम 7:47शाम 6:04 से 7:19 बजे तक
लद्दाख
लेहशाम 7:13शाम 5:42 से 6:58 बजे तक
सिक्किम
गंगटोकशाम 6:46शाम 5:04 से 6:19 बजे तक
हरियाणा
गुरुग्रामशाम 7:31शाम 5:49 से 7:04 बजे तक
फ़रीदाबादशाम 7:30शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
हिमाचल प्रदेश
शिमलाशाम 7:23शाम 5:46 से 7:02 बजे तक

दूसरे वर्ष

करवा चौथ 2026: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
तिथि
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
चतुर्थी प्रारंभ
29 अक्टूबर, रात 1:07
चतुर्थी समाप्त
29 अक्टूबर, रात 10:11
चंद्रोदय
रात 8:12
पूजा मुहूर्त
शाम 5:38 से 6:55 बजे तक
व्रत
सुबह 6:30 से रात 8:12 (चंद्रोदय) तक
सूर्यास्त
शाम 5:38

कैसे मनाएं

  1. सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है, जो अक्सर सास भेजती हैं।
  2. पूरे दिन बिना अन्न और जल के व्रत रखा जाता है।
  3. दोपहर बाद महिलाएं करवा और थाली लेकर साथ बैठती हैं और कथा सुनती हैं।
  4. चांद निकलने पर अर्घ्य दिया जाता है और छलनी से पहले चांद, फिर पति को देखा जाता है।
  5. पति पानी का पहला घूंट और पहला कौर देकर व्रत खुलवाते हैं।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Karva Chauth आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Karva Chauth के बाद आने वाले त्योहार

करवा चौथ के बारे में

उत्तर भारत में चलने वाले पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। इस दिन सुहागिनें सूर्योदय से पहले से लेकर चंद्रोदय तक न कुछ खाती हैं, न पानी पीती हैं। यह व्रत पति की कुशलता और सुखी दांपत्य की कामना से रखा जाता है। आजकल कई घरों में कुंवारी लड़कियां और पति भी यह व्रत रखते हैं। नाम में करवा है, यानी टोंटी वाला मिट्टी का छोटा घड़ा जो शाम की पूजा के बीच में रखा जाता है, और चौथ, यानी चतुर्थी। गर्भवती, बीमार या बुजुर्ग महिलाएं अक्सर पानी या फल लेकर व्रत रखती हैं, और यह भी पूरी श्रद्धा का ही व्रत है।

दिन की शुरुआत अंधेरे में सरगी से होती है, जो अक्सर सास भेजती या परोसती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे, फेनी और कई बार सुहाग का सामान भी होता है। इसके बाद पूरे दिन व्रत चलता है। महिलाएं शादी का जोड़ा या लाल कपड़े पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और दोपहर बाद परिवार या मोहल्ले की औरतें एक साथ बैठती हैं। करवे और थालियां लेकर गोल घेरे में बैठकर कथा सुनी जाती है, जिसमें अक्सर रानी वीरावती की श्रद्धा की कहानी होती है, और गीत गाते हुए थालियां एक हाथ से दूसरे हाथ घुमाई जाती हैं।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह त्योहार सबसे ज्यादा मनाया जाता है, और इन इलाकों के परिवार जहां भी बसे हैं, वहां इसे निभाते हैं। हर घर की रीत थोड़ी अलग होती है: कथा के बोल, सरगी में क्या रखा जाए, करवे में क्या भरा जाए और पूजा के बाद पानी लिया जाए या नहीं।

चांद निकलने पर महिला थाली में दीया रखकर छलनी से चांद देखती है, करवे से चांद को अर्घ्य देती है और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती है। पति उसे पानी का पहला घूंट पिलाकर और पहला कौर खिलाकर व्रत खुलवाते हैं। हर शहर में चांद एक ही समय पर नहीं निकलता। देश के पूर्व में वह पहले दिखता है और पश्चिम में बाद में, इसीलिए इस पेज की शहरों वाली तालिका में चंद्रोदय का समय अलग अलग है। हर परिवार अपने शहर में चांद दिखने पर ही व्रत खोलता है।

व्रत का दिन उस चतुर्थी तिथि से तय होता है जो चंद्रोदय के समय मौजूद हो। बादलों की वजह से चांद न दिखे तो परिवार अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलते हैं।