पितृ पक्ष 2027
गुरुवार, 16 सितंबर 2027 · 320 दिन बाद
पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं, वह पखवाड़ा है जब परिवार अपने माता-पिता, दादा-दादी और सभी पूर्वजों को जल, अन्न और श्रद्धा के साथ याद करते हैं।
Pitru Paksha की पूजाएं, क्रम से
पितृ पक्ष 2027: तिथि और समय
- तारीख
- गुरुवार, 16 सितंबर 2027
- तिथि
- आश्विन कृष्ण प्रतिपदा
- प्रतिपदा प्रारंभ
- 16 सितंबर, सुबह 4:34
- प्रतिपदा समाप्त
- 17 सितंबर, सुबह 5:53
- सूर्योदय
- सुबह 6:06
- सूर्यास्त
- शाम 6:25
सभी दिन
- बुधवार, 15 सितंबर 2027पूर्णिमा श्राद्ध
- गुरुवार, 16 सितंबर 2027प्रतिपदा श्राद्ध, पितृ पक्ष प्रारंभ
- शुक्रवार, 17 सितंबर 2027द्वितीया श्राद्ध
- शनिवार, 18 सितंबर 2027तृतीया श्राद्ध
- रविवार, 19 सितंबर 2027चतुर्थी श्राद्ध
- सोमवार, 20 सितंबर 2027पंचमी श्राद्ध
- मंगलवार, 21 सितंबर 2027षष्ठी श्राद्ध
- बुधवार, 22 सितंबर 2027सप्तमी श्राद्ध
- गुरुवार, 23 सितंबर 2027अष्टमी श्राद्ध
- शुक्रवार, 24 सितंबर 2027नवमी श्राद्ध
- शनिवार, 25 सितंबर 2027दशमी श्राद्ध
- रविवार, 26 सितंबर 2027एकादशी श्राद्ध
- सोमवार, 27 सितंबर 2027द्वादशी श्राद्ध
- सोमवार, 27 सितंबर 2027त्रयोदशी श्राद्ध
- मंगलवार, 28 सितंबर 2027चतुर्दशी श्राद्ध
- बुधवार, 29 सितंबर 2027सर्वपितृ अमावस्या
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
पितृ पक्ष 2026: तिथि और समय
- तारीख
- रविवार, 27 सितंबर 2026
- तिथि
- आश्विन कृष्ण प्रतिपदा
- प्रतिपदा प्रारंभ
- 26 सितंबर, रात 10:19
- प्रतिपदा समाप्त
- 27 सितंबर, रात 8:59
- सूर्योदय
- सुबह 6:11
- सूर्यास्त
- शाम 6:12
कैसे मनाएं
- जिस तिथि को माता-पिता या पूर्वज का देहांत हुआ, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करें।
- तिथि पता न हो तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करें।
- काले तिल और कुश मिले जल से पूर्वजों के नाम लेकर तर्पण करें।
- सादा भोजन बनाकर कौए, गाय और कुत्ते का हिस्सा निकालें और ब्राह्मणों या मेहमानों को खिलाएं।
- पूर्वजों की याद में ज़रूरतमंदों को भोजन या अनाज दें।
आपकी कुंडली के लिए
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Pitru Paksha के बाद आने वाले त्योहार
पितृ पक्ष के बारे में
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा के बाद शुरू होता है और कृष्ण पक्ष के दिनों से होता हुआ सर्वपितृ अमावस्या पर पूरा होता है। उत्तर भारत में इसे आश्विन कृष्ण पक्ष कहते हैं, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के अमांत पंचांग में यही दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष कहलाते हैं। नाम अलग है, दिन वही हैं। 'पितृ' का अर्थ है पूर्वज, और 'श्राद्ध' शब्द श्रद्धा से बना है, यानी आदर के साथ किया गया अर्पण।
भाव बहुत सीधा है: साल में एक बार परिवार रुककर उन्हें याद करता है जिनसे उसे जीवन और नाम मिला। किसी पूर्वज का श्राद्ध उसी तिथि पर किया जाता है जिस तिथि को उनका देहांत हुआ था, चाहे वह शुक्ल पक्ष रहा हो या कृष्ण पक्ष। जैसे जिनका देहांत पंचमी को हुआ, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की पंचमी को होता है। जिन्हें तिथि याद नहीं, या जो सबको एक साथ याद करना चाहते हैं, वे अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करते हैं। कुछ दिनों की अपनी रीत है: नवमी को मातृ नवमी कहते हैं, जब माताओं और घर की उन स्त्रियों को याद किया जाता है जिनका देहांत पति से पहले हुआ, और शुरुआत में आने वाला पूर्णिमा श्राद्ध उनके लिए है जिनका देहांत पूर्णिमा को हुआ।
इस पेज पर पितृ पक्ष के सभी श्राद्ध दिनों की सूची है। अपना दिन जानने के लिए वह तिथि देखें जिस दिन आपके माता-पिता या दादा-दादी का देहांत हुआ था, फिर सूची में वही तिथि ढूंढें। अगर तिथि पक्की न हो, तो घर के बड़े अक्सर याद रखते हैं, और सर्वपितृ अमावस्या का दिन तो सबके लिए है।
श्राद्ध आम तौर पर दोपहर या दोपहर बाद किया जाता है, जब तिथि मौजूद हो। इसमें तर्पण होता है, यानी काले तिल और कुश मिले जल से पूर्वजों के नाम लेकर अर्पण, और जहां परंपरा हो वहां पिंडदान भी। घर में सादा भोजन बनता है, अक्सर खीर, पूरी और मौसमी सब्ज़ी। ब्राह्मणों या मेहमानों को खिलाने और परिवार के खाने से पहले कौए, गाय और कुत्ते के लिए हिस्सा अलग रखा जाता है। बहुत से परिवार ज़रूरतमंदों को भोजन या अनाज भी देते हैं।
पितृ पक्ष याद करने का समय है, चिंता का नहीं। बहुत से परिवार इन दिनों को सादगी से बिताते हैं और नए काम नवरात्रि तक के लिए रख देते हैं, हर कोई अपनी परंपरा के अनुसार।
