शारदीय नवरात्रि के बारे में
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है, महालया अमावस्या के अगले दिन, और नौ रातों तक चलती है। यह देवी दुर्गा और महिषासुर पर उनकी विजय का उत्सव है, और दसवां दिन, विजयादशमी या दशहरा, उसी जीत का दिन है। 'शरद' का अर्थ है शरद ऋतु, और ज़्यादातर घरों में यही नवरात्रि रखी जाती है। दूसरी बड़ी नवरात्रि वसंत में चैत्र नवरात्रि है।
पहले दिन बहुत से घरों में घटस्थापना होती है। मिट्टी में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश रखा जाता है, ऊपर आम के पत्ते और नारियल, और देवी का आवाहन किया जाता है। कई घरों में अखंड ज्योति भी जलाई जाती है, जो पूरे नौ दिन जलती रहती है। हर दिन दुर्गा के नौ रूपों में से एक को समर्पित है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। बहुत से लोग नौ दिन फलाहार और सादे भोजन के साथ व्रत रखते हैं, तो कुछ लोग पहले और आखिरी दिन।
हर इलाके की नवरात्रि अपनी है। गुजरात में रातें गरबा और डांडिया रास की होती हैं, जो मिट्टी के घड़े में रखे दीपक के चारों ओर घेरे में नाचे जाते हैं। बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में षष्ठी से सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक दुर्गा पूजा की धूम रहती है, पंडाल सजते हैं, भोग बंटता है और धुनुची नाच होता है। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में घरों में गोलू या बोम्बे हब्बा सजता है, यानी सीढ़ियों पर गुड़ियों की झांकी, जिसे देखने दोस्त और पड़ोसी आते हैं। उत्तर भारत में रात-रात रामलीला होती है, जो दशहरे पर रावण दहन तक पहुंचती है।
अष्टमी और नवमी का खास महत्व है, और कई घरों में इन दिनों कन्या पूजन होता है। यह पेज नवरात्रि के सभी नौ दिनों को, हर दिन की देवी के साथ, दिखाता है।
घटस्थापना प्रतिपदा की सुबह की जाती है। जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो नवरात्रि एक दिन छोटी या बड़ी हो सकती है। व्रत और पूजा के नियम हर परिवार अपनी परंपरा से निभाता है।