पहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तकपहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तक
आपके शहर का आज का पंचांग →
त्योहार · Kartik Shukla Dwadashi

तुलसी विवाह 2026

शनिवार, 21 नवंबर 2026 · 21 दिन बाद

Vishnuत्योहारपूरे भारत में
Delhi · समय IST में

तुलसी विवाह में घर की तुलसी का विवाह भगवान विष्णु से उतने ही चाव से कराया जाता है जितना घर की किसी बेटी का। बहुत से परिवारों के लिए इसी से शादियों का मौसम शुरू होता है।

Tulsi Vivah की पूजाएं, क्रम से

Tulsi Puja

तुलसी पूजा
Evening

Tulsi is married to Vishnu as Shaligram, and the wedding season begins.

क्या चाहिए
  • Tulsi plant
  • Red chunri
  • Kumkum
  • Ghee diya
  • Sweets
विधि
  1. Light a ghee diya at the tulsi plant.
  2. Offer kumkum and a red chunri.
  3. Walk around the plant seven times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥vrinda vrindavani vishvapujita vishvapavani, pushpasara nandani cha tulasi krishnajivani
आरती: Jai Jai Tulsi Mata

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥

आरती के शुरुआती पद।

Vishnu Puja

विष्णु पूजा
Evening, as the groom

Vishnu is worshipped as the one who keeps the world in order, with tulsi and yellow flowers.

क्या चाहिए
  • Vishnu idol or Shaligram
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Bathe the idol or Shaligram with panchamrit.
  2. Offer tulsi leaves and yellow flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवायom namo bhagavate vasudevaya
आरती: Om Jai Jagdish Hare

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

दीन बन्धु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Tulsi Puja

तुलसी पूजा
Evening

Tulsi is married to Vishnu as Shaligram, and the wedding season begins.

क्या चाहिए
  • Tulsi plant
  • Red chunri
  • Kumkum
  • Ghee diya
  • Sweets
विधि
  1. Light a ghee diya at the tulsi plant.
  2. Offer kumkum and a red chunri.
  3. Walk around the plant seven times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥vrinda vrindavani vishvapujita vishvapavani, pushpasara nandani cha tulasi krishnajivani
आरती: Jai Jai Tulsi Mata

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥

आरती के शुरुआती पद।

Vishnu Puja

विष्णु पूजा
Evening, as the groom

Vishnu is worshipped as the one who keeps the world in order, with tulsi and yellow flowers.

क्या चाहिए
  • Vishnu idol or Shaligram
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Bathe the idol or Shaligram with panchamrit.
  2. Offer tulsi leaves and yellow flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवायom namo bhagavate vasudevaya
आरती: Om Jai Jagdish Hare

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

दीन बन्धु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ क्ष्रौं नमो नरसिंहाय om kshraum namo narasimhaya

तुलसी विवाह 2026: तिथि और समय

तारीख
शनिवार, 21 नवंबर 2026
तिथि
कार्तिक शुक्ल द्वादशी
द्वादशी प्रारंभ
21 नवंबर, सुबह 6:32
द्वादशी समाप्त
22 नवंबर, सुबह 4:57
सूर्योदय
सुबह 6:48
सूर्यास्त
शाम 5:25

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

तुलसी विवाह 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 11 नवंबर 2027
तिथि
कार्तिक शुक्ल द्वादशी
द्वादशी प्रारंभ
10 नवंबर, सुबह 9:12
द्वादशी समाप्त
11 नवंबर, सुबह 10:08
सूर्योदय
सुबह 6:40
सूर्यास्त
शाम 5:29

कैसे मनाएं

  1. तुलसी के गमले को साफ करके चुनरी, चूड़ियों और फूलों से दुल्हन की तरह सजाएँ।
  2. तुलसी के ऊपर गन्ने से छोटा सा मंडप बनाएँ।
  3. दूल्हे के रूप में शालिग्राम या कृष्ण की मूर्ति तुलसी के पास रखें।
  4. शाम को मंगल गीतों के साथ तुलसी के चारों ओर फेरे कराएँ।
  5. मिठाई, आँवला और मौसमी चीज़ों का भोग लगाकर प्रसाद सबमें बाँटें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Tulsi Vivah आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Tulsi Vivah के बाद आने वाले त्योहार

तुलसी विवाह के बारे में

घरों में सुनाई जाने वाली कथा के अनुसार वृंदा अपनी भक्ति और पतिव्रत के लिए जानी जाती थीं। माना जाता है कि उन्होंने तुलसी का रूप लिया और भगवान विष्णु ने वचन दिया कि हर वर्ष शालिग्राम रूप में उनका विवाह तुलसी से होगा। तुलसी लगभग हर हिंदू घर के आँगन या बालकनी में होती है और विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसलिए यह विवाह उस पौधे के प्रति प्रेम और आदर है जिसकी सेवा घर-परिवार पूरे साल करता है।

यह पर्व देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के ठीक बाद आता है, जब माना जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। बहुत से परिवार कार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी विवाह करते हैं, कुछ एकादशी के दिन ही, और कुछ कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शाम। उत्तर और पश्चिम भारत में यह बड़े प्रेम से मनाया जाता है, और गुजरात और महाराष्ट्र के कई मंदिरों में सामूहिक तुलसी विवाह भी होता है।

तुलसी के गमले को रंग-रोगन करके दुल्हन की तरह सजाया जाता है: लाल चुनरी, चूड़ियाँ, बिंदी और फूल। गन्ने से छोटा सा मंडप बनाया जाता है। दूल्हे के रूप में शालिग्राम या कृष्ण की छोटी मूर्ति रखी जाती है और फिर विवाह की रस्में होती हैं: गठबंधन, तुलसी के चारों ओर फेरे, मंगल गीत, और मिठाई, आँवला, गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद जैसी मौसमी चीज़ों का भोग। कई घरों में परिवार तुलसी का कन्यादान वैसे ही करता है जैसे अपनी बेटी का।

चूँकि इसी समय भगवान विष्णु के जागने की मान्यता है, इसलिए चातुर्मास के पूरे होने और तुलसी विवाह के साथ शादी-ब्याह और दूसरे मांगलिक काम फिर शुरू होते हैं। किस दिन विवाह करना है, यह हर परिवार अपनी परंपरा से तय करता है। ऊपर दी गई तारीख आपके स्थान के लिए कार्तिक शुक्ल द्वादशी बताती है।