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त्योहार · Kartik Shukla Shashthi

छठ पूजा 2026

रविवार, 15 नवंबर 2026 · 15 दिन बाद

Suryaत्योहारBihar, Jharkhand, East UP

छठ पूजा आस्था, सादगी और संयम का पर्व है। चार दिन तक व्रती सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं और पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

Sandhya ArghyaSunset शाम 5:27

षष्ठी पर डूबते सूर्य को अर्घ्य। षष्ठी 14 नवंबर को रात 11:25 बजे से 16 नवंबर को रात 2:02 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

छठ पूजा के चार दिन

13 से 16 नव॰
  1. 13 नव॰नहाय खाय
  2. 14 नव॰खरना
  3. 15 नव॰संध्या अर्घ्यसूर्यास्त पर, शाम 5:27
  4. 16 नव॰उषा अर्घ्यसूर्योदय पर, सुबह 6:44

Chhath Puja की पूजाएं, क्रम से

Surya Puja

सूर्य पूजा
At sunset on Shashthi and sunrise on Saptami

Surya and Chhathi Maiya are offered arghya at the setting and the rising sun.

क्या चाहिए
  • Copper pot of water
  • Red flowers
  • Rice and kumkum
  • Jaggery
विधि
  1. Face the rising sun after a bath.
  2. Add red flowers, rice and kumkum to the water.
  3. Pour the water in a thin stream while chanting the mantra.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ घृणिः सूर्याय नमःom ghrinih suryaya namah
आरती: Om Jai Surya Bhagwan

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Surya Puja

सूर्य पूजा
At sunset on Shashthi and sunrise on Saptami

Surya and Chhathi Maiya are offered arghya at the setting and the rising sun.

क्या चाहिए
  • Copper pot of water
  • Red flowers
  • Rice and kumkum
  • Jaggery
विधि
  1. Face the rising sun after a bath.
  2. Add red flowers, rice and kumkum to the water.
  3. Pour the water in a thin stream while chanting the mantra.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ घृणिः सूर्याय नमःom ghrinih suryaya namah
आरती: Om Jai Surya Bhagwan

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ हीं घृणिः सूर्य आदित्यः श्रीं om hreem ghrinih surya adityah shreem

छठ पूजा 2026: तिथि और समय

तारीख
रविवार, 15 नवंबर 2026
तिथि
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
षष्ठी प्रारंभ
14 नवंबर, रात 11:25
षष्ठी समाप्त
16 नवंबर, रात 2:02
संध्या अर्घ्य, सूर्यास्त
शाम 5:27
सूर्योदय
सुबह 6:43

सभी दिन

  1. शुक्रवार, 13 नवंबर 2026नहाय खाय
  2. शनिवार, 14 नवंबर 2026खरना
  3. रविवार, 15 नवंबर 2026संध्या अर्घ्य
  4. सोमवार, 16 नवंबर 2026उषा अर्घ्य

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

छठ पूजा 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 4 नवंबर 2027
तिथि
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
षष्ठी प्रारंभ
3 नवंबर, शाम 7:33
षष्ठी समाप्त
4 नवंबर, रात 9:39
संध्या अर्घ्य, सूर्यास्त
शाम 5:34
सूर्योदय
सुबह 6:34

कैसे मनाएं

  1. नहाय खाय: स्नान करें, घर साफ करें और लौकी, चने की दाल और चावल का सादा भोजन एक बार लें।
  2. खरना: दिन भर उपवास रखें और शाम को गुड़ की खीर और रोटी से व्रत खोलें।
  3. ठेकुआ बनाएँ और सूप में फल, गन्ना और नारियल सजाकर अर्घ्य की तैयारी करें।
  4. संध्या अर्घ्य: घाट पर पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दें।
  5. उषा अर्घ्य: भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दें और फिर प्रसाद लेकर व्रत खोलें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Chhath Puja आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Chhath Puja के बाद आने वाले त्योहार

छठ पूजा के बारे में

छठ बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र का सबसे बड़ा लोकपर्व है। यह दिवाली के छह दिन बाद, कार्तिक शुक्ल पक्ष में आता है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है। छठी मैया को संतान और परिवार की देखभाल करने वाली माँ के रूप में पूजा जाता है। आज जहाँ भी इन क्षेत्रों के परिवार बसे हैं, दिल्ली और मुंबई से लेकर विदेशों तक, वहाँ नदी, तालाब या छत पर बने कुंड में छठ मनाया जाता है।

यह पर्व चार दिन चलता है। पहले दिन नहाय खाय होता है: व्रती स्नान करके घर साफ करते हैं और एक बार सात्विक भोजन करते हैं, जिसमें आमतौर पर लौकी की सब्ज़ी, चने की दाल और चावल बनते हैं। दूसरे दिन खरना होता है। दिन भर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर, जिसे रसियाव कहते हैं, और रोटी का भोग लगता है और यही प्रसाद सबमें बाँटा जाता है। खरना के बाद बहुत से व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जो सुबह के अर्घ्य तक चलता है। जिनकी तबीयत ठीक न हो, गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग और बच्चे अक्सर पानी या फल लेकर हल्का व्रत रखते हैं, और इसमें भी छठ की वही श्रद्धा है।

तीसरे दिन संध्या अर्घ्य होता है। घर के लोग बाँस के सूप और दौरे में ठेकुआ, फल, गन्ना और नारियल सजाकर घाट पर जाते हैं। व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन सुबह उषा अर्घ्य होता है: भोर से पहले सब फिर घाट पर जुटते हैं, उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और फिर प्रसाद लेकर व्रत खोला जाता है।

छठ की पहचान उसकी शुद्धता और सादगी है: घर में बना प्रसाद, साफ-सुथरे घाट, मिट्टी के दीये और घाट जाते हुए महिलाओं के गाए छठ के गीत। इसे सूर्य को जीवन और प्रकाश के लिए धन्यवाद कहने का समय माना जाता है। हर घर की अपनी परंपरा होती है, इसलिए प्रसाद और विधि में थोड़ा-बहुत अंतर दिखता है। इस पेज पर चारों दिन दिए गए हैं, और दोनों अर्घ्य के दिन आपके शहर का सूर्यास्त और सूर्योदय का समय भी।