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त्योहार · Magh Shukla Panchami

वसंत पंचमी 2027

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027 · 103 दिन बाद

Saraswatiत्योहारपूरे भारत में
Delhi · समय IST में

बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन और विद्या, वाणी व संगीत की देवी माँ सरस्वती की पूजा का त्योहार है। इस दिन घर-घर में पीला रंग छाया रहता है और कई बच्चे अपना पहला अक्षर लिखते हैं।

Vasant Panchami की पूजाएं, क्रम से

Saraswati Puja

सरस्वती पूजा
Morning, before noon

Saraswati is honoured as spring begins, and children often start their letters today.

क्या चाहिए
  • Saraswati picture
  • White or yellow flowers
  • Books, pens or an instrument
  • Yellow sweets
  • Ghee diya
विधि
  1. Place books or an instrument before Saraswati.
  2. Offer yellow flowers and sweets, and light the diya.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रसरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥sarasvati namastubhyam varade kamarupini, vidyarambham karishyami siddhirbhavatu me sada
आरती: Jai Saraswati Mata

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Saraswati Puja

सरस्वती पूजा
Morning, before noon

Saraswati is honoured as spring begins, and children often start their letters today.

क्या चाहिए
  • Saraswati picture
  • White or yellow flowers
  • Books, pens or an instrument
  • Yellow sweets
  • Ghee diya
विधि
  1. Place books or an instrument before Saraswati.
  2. Offer yellow flowers and sweets, and light the diya.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रसरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥sarasvati namastubhyam varade kamarupini, vidyarambham karishyami siddhirbhavatu me sada
आरती: Jai Saraswati Mata

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ ऐं नमो भगवति वद वद... Sarasvati mantra
  • ॐ त्रीं हीं हुं नमस्तारायै महातारायै... Nilasarasvati mantra
  • ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः क्लीं... Vidya Rajni mantra

वसंत पंचमी 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
तिथि
माघ शुक्ल पंचमी
पंचमी प्रारंभ
11 फ़रवरी, रात 3:05
पंचमी समाप्त
12 फ़रवरी, रात 3:19
सूर्योदय
सुबह 7:03
सूर्यास्त
शाम 6:08

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

वसंत पंचमी 2026: तिथि और समय

तारीख
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
तिथि
माघ शुक्ल पंचमी
पंचमी प्रारंभ
23 जनवरी, रात 2:29
पंचमी समाप्त
24 जनवरी, रात 1:47
सूर्योदय
सुबह 7:13
सूर्यास्त
शाम 5:52

कैसे मनाएं

  1. सुबह जल्दी स्नान करके पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  2. माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप और पीले फूल रखें।
  3. किताबें, कलम और वाद्य यंत्र माँ के सामने रखकर आशीर्वाद लें।
  4. पीली मिठाई या केसरिया चावल का भोग लगाकर परिवार में बाँटें।
  5. परिवार की परंपरा हो तो छोटे बच्चों से पहला अक्षर लिखवाएँ।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Vasant Panchami आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Vasant Panchami के बाद आने वाले त्योहार

वसंत पंचमी के बारे में

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस समय सर्दी ढलने लगती है, खेतों में सरसों पीली होकर लहलहाती है और मौसम में नई ताज़गी आती है। यह दिन माँ सरस्वती को समर्पित है, जिन्हें ज्ञान, वाणी, संगीत और कला की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माँ सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए कई जगह इसे सरस्वती जयंती भी कहा जाता है।

देश भर में यह त्योहार अपने-अपने रंग में मनाया जाता है। बंगाल, ओडिशा और असम में सरस्वती पूजा विद्यार्थियों का सबसे प्रिय दिन है, जब घरों, स्कूलों और मोहल्लों के पंडालों में माँ की प्रतिमा सजाई जाती है। पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इसे बसंत कहते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। बहुत से लोग इस दिन को नया काम शुरू करने के लिए भी अच्छा मानते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसके लिए अलग से मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं होती।

इस दिन पीले रंग का खास महत्व है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं, माँ को गेंदे जैसे पीले फूल चढ़ाते हैं और केसरिया चावल, बूंदी, बेसन के लड्डू या केसर का हलवा बनाते हैं। किताबें, कलम, कॉपियाँ और वाद्य यंत्र माँ के सामने रखकर उनका आशीर्वाद माँगा जाता है। छोटे बच्चों का विद्यारंभ भी इसी दिन कराया जाता है, जब माता-पिता या घर के बड़े उनका हाथ पकड़कर पहला अक्षर या ॐ लिखवाते हैं।

एक व्यावहारिक बात: यह त्योहार पंचमी तिथि से तय होता है, और पूजा के लिए आमतौर पर वह दिन चुना जाता है जब दिन के पहले भाग में पंचमी हो। अगर तिथि दो दिनों में फैली हो, तो ऊपर दी गई तारीख बताती है कि कौन सा दिन उपयुक्त है। बाकी हर परिवार अपनी परंपरा के अनुसार, सादगी से या धूमधाम से, यह दिन मनाता है।