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त्योहार · Phalgun Krishna Chaturdashi

महाशिवरात्रि 2027

शनिवार, 6 मार्च 2027 · 126 दिन बाद

Shivaत्योहारपूरे भारत में

महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे बड़ी रात है। भक्त दिन भर व्रत रखते हैं, रात भर जागते हैं और ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं।

Nishita puja muhuratरात 12:08 से 12:57 बजे तक

मध्यरात्रि का समय, चतुर्दशी के भीतर। चतुर्दशी 6 मार्च को दोपहर 12:04 बजे से 7 मार्च को दोपहर 1:47 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

Maha Shivratri की पूजाएं, क्रम से

Shiva Puja

शिव पूजा
Through the night; nishita puja 12:08 AM to 12:57 AM

Shiva's great night, kept awake with worship until the nishita hour.

क्या चाहिए
  • Shiva lingam or picture
  • Water or Gangajal
  • Raw milk
  • Bilva leaves
  • White flowers
  • Ghee diya
विधि
  1. Pour water, then milk, slowly over the lingam.
  2. Offer bilva leaves and white flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमः शिवायom namah shivaya
आरती: Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Shiva Puja

शिव पूजा
Through the night; nishita puja 12:08 AM to 12:57 AM

Shiva's great night, kept awake with worship until the nishita hour.

क्या चाहिए
  • Shiva lingam or picture
  • Water or Gangajal
  • Raw milk
  • Bilva leaves
  • White flowers
  • Ghee diya
विधि
  1. Pour water, then milk, slowly over the lingam.
  2. Offer bilva leaves and white flowers.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रॐ नमः शिवायom namah shivaya
आरती: Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः... Mritunjaya mantra
  • ऐं क्लीं सौः aim kleem sauh
  • ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra

महाशिवरात्रि 2027: तिथि और समय

तारीख
शनिवार, 6 मार्च 2027
तिथि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
चतुर्दशी प्रारंभ
6 मार्च, दोपहर 12:04
चतुर्दशी समाप्त
7 मार्च, दोपहर 1:47
निशीथ काल पूजा मुहूर्त
रात 12:08 से 12:57 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:41
सूर्यास्त
शाम 6:23

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

महाशिवरात्रि 2026: तिथि और समय

तारीख
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
तिथि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
चतुर्दशी प्रारंभ
15 फ़रवरी, शाम 5:06
चतुर्दशी समाप्त
16 फ़रवरी, शाम 5:35
निशीथ काल पूजा मुहूर्त
रात 12:09 से 1:01 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:59
सूर्यास्त
शाम 6:11

कैसे मनाएं

  1. सुबह स्नान करके शिव मंदिर जाएँ या घर पर शिवलिंग स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें।
  2. अपनी सेहत के अनुसार व्रत रखें: जल, फल और दूध के साथ या एक समय सादे भोजन के साथ।
  3. शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएँ, साथ में सफ़ेद फूल और फल अर्पित करें।
  4. रात के चारों प्रहर में पूजा करें, या कम से कम आधी रात को एक बार पूजन करें।
  5. भजन और ॐ नमः शिवाय के जाप के साथ जागरण करें और अगली सुबह व्रत खोलें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Maha Shivratri आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Maha Shivratri के बाद आने वाले त्योहार

महाशिवरात्रि के बारे में

उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आती है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के अमांत पंचांग में यही रात माघ महीने में गिनी जाती है। हर महीने एक शिवरात्रि होती है, पर यह सबसे बड़ी मानी जाती है। इससे जुड़ी कई कथाएँ कही जाती हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि इसी रात शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। एक कथा यह भी है कि शिव एक अनंत ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि और अंत ब्रह्मा और विष्णु भी नहीं खोज पाए। कई भक्तों के लिए यह बस शिव के पास बैठने की रात है।

यह त्योहार पूरे भारत और नेपाल में मनाया जाता है। ज्योतिर्लिंगों, वाराणसी के काशी विश्वनाथ और काठमांडू के पशुपतिनाथ से लेकर गाँव के छोटे शिवालयों तक भक्तों की भीड़ उमड़ती है। कश्मीरी पंडित इसे हेरथ के नाम से अपने खास रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं।

दिन की शुरुआत स्नान और व्रत के संकल्प से होती है। कोई निर्जला व्रत रखता है, कोई फल और दूध लेता है, तो कोई एक समय सादा भोजन करता है; हर कोई अपनी सेहत और घर की परंपरा के अनुसार व्रत रखता है। इस त्योहार का असली केंद्र रात है। रात को चार प्रहरों में बाँटा जाता है और हर प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन होता है: जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से स्नान, फिर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, सफ़ेद फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बीच भजन-कीर्तन, ॐ नमः शिवाय का जाप और जागरण सुबह तक चलता है। अगली सुबह अंतिम पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।

एक व्यावहारिक बात: शिवरात्रि उस चतुर्दशी तिथि से तय होती है जो आधी रात, यानी निशीथ काल में हो। इसलिए त्योहार की तारीख और सूर्योदय की तिथि अलग हो सकती है। व्रत खोलने यानी पारण का समय हर परिवार और मंदिर अपनी परंपरा से तय करता है।