पहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तकपहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तक
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गुरु (बृहस्पति) ज्ञान, गुरु, संतान, आस्था, विकास और सौभाग्य का कारक है। यहाँ 2026 और 2027 की गुरु से जुड़ी हर घटना है, वैदिक ज्योतिष की निरयण राशि पद्धति में, भारतीय समय के साथ।
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।
आकाश में गुरु क्या कर रहा है
गुरु आम तौर पर एक राशि में लगभग एक साल रहता है, इसलिए गुरु गोचर साल की सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली घटनाओं में है। 2026 और 2027 में गुरु कुछ-कुछ महीनों के लिए तेज़ चलता है, जिसे परंपरा अतिचारी गति कहती है, इसलिए वह सिंह में प्रवेश करके कर्क में लौटता है और फिर स्थिर होता है।
गुरु वक्री काल
गुरु साल में एक बार लगभग चार महीने के लिए वक्री होता है। परंपरा इसे पहले से बढ़ रही चीज़ों को गहरा करने का समय मानती है: अध्ययन, चिंतन, किसी गुरु या लंबे काम की ओर लौटना। वक्री गुरु को चेष्टा बल में बलवान माना जाता है।
छाया काल आकाश का वह हिस्सा है जिसे ग्रह तीन बार पार करता है: वक्री होने से पहले वह उस अंश से गुज़रता है जहाँ वह बाद में मार्गी होगा, और मार्गी होने के बाद वह फिर आगे चलकर उस अंश तक पहुँचता है जहाँ वह वक्री हुआ था।
गुरु वक्री 2026
गुरु वक्री: 11 नवंबर 2025 से 11 मार्च 2026 (कर्क से मिथुन)
यह वक्री काल 2025 में शुरू हुआ और इस साल तक चलता है।
वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(कर्क के 0°56' पर)
वक्री गति में कर्क से मिथुन में लौटता है
मार्गी होता है
(मिथुन के 20°52' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
119 दिन
गुरु वक्री: 13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल 2027 (सिंह से कर्क)
गुरु अगली बार 28 फ़रवरी 2028 को वक्री गति में सिंह में प्रवेश करता है।
आपकी चंद्र राशि से गुरु किस भाव में गोचर करता है
पहले कॉलम में अपनी चंद्र राशि खोजें। बाकी हर कॉलम वह राशि है जिसमें ग्रह 2026 और 2027 में रहता है, और खाने में लिखा भाव आपकी चंद्र राशि से उस राशि की गिनती है। तालिका के बाद की सूची बताती है कि परंपरा हर भाव को किस विषय से जोड़ती है।
आपकी चंद्र राशि
गुरु मिथुन में
गुरु कर्क में
गुरु सिंह में
गुरु कन्या में
मेष
तीसरा
चौथा
पाँचवाँ
छठा
वृषभ
दूसरा
तीसरा
चौथा
पाँचवाँ
मिथुन
पहला
दूसरा
तीसरा
चौथा
कर्क
बारहवाँ
पहला
दूसरा
तीसरा
सिंह
ग्यारहवाँ
बारहवाँ
पहला
दूसरा
कन्या
दसवाँ
ग्यारहवाँ
बारहवाँ
पहला
तुला
नौवाँ
दसवाँ
ग्यारहवाँ
बारहवाँ
वृश्चिक
आठवाँ
नौवाँ
दसवाँ
ग्यारहवाँ
धनु
सातवाँ
आठवाँ
नौवाँ
दसवाँ
मकर
छठा
सातवाँ
आठवाँ
नौवाँ
कुम्भ
पाँचवाँ
छठा
सातवाँ
आठवाँ
मीन
चौथा
पाँचवाँ
छठा
सातवाँ
चंद्र राशि से हर भाव किन विषयों का है
पहला भाव: स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण
दूसरा भाव: परिवार, वाणी और बचत
तीसरा भाव: प्रयास, साहस, भाई-बहन और संदेश
चौथा भाव: घर, माता और मन की शांति
पाँचवाँ भाव: संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता
छठा भाव: रोज़ का काम, सेहत की आदतें और सेवा
सातवाँ भाव: साझेदारी और विवाह
आठवाँ भाव: साझा धन, बदलाव और शोध
नौवाँ भाव: गुरु, उच्च शिक्षा, आस्था और लंबी यात्राएँ
दसवाँ भाव: करियर और सार्वजनिक पहचान
ग्यारहवाँ भाव: लाभ, मित्र और आशाएँ
बारहवाँ भाव: विश्राम, खर्च, विदेश यात्रा और छोड़ना
आपके लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है
गोचर चंद्र राशि से पढ़ा जाता है: नीचे की तालिका बताती है कि गुरु आपकी चंद्र राशि से किस भाव से गुज़रता है। परंपरा कुछ भावों को अधिक अनुकूल मानती है, पर कोई गोचर क्या लाएगा, यह आपकी पूरी कुंडली, उसमें गुरु की अपनी स्थिति और आपकी दशा पर निर्भर है।
2026 में गुरु 2 बार वक्री होता है: 11 नवंबर 2025, रात 10:11 बजे से 11 मार्च 2026, सुबह 9:00 बजे तक; 13 दिसंबर 2026, सुबह 6:26 बजे से 13 अप्रैल 2027, सुबह 7:42 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।
2027 में गुरु कब वक्री है?
2027 में गुरु एक बार वक्री होता है: 13 दिसंबर 2026, सुबह 6:26 बजे से 13 अप्रैल 2027, सुबह 7:42 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।
2026 में गुरु कब राशि बदलता है?
2026 में गुरु का राशि परिवर्तन: 2 जून 2026, रात 2:25 बजे, कर्क में; 31 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:51 बजे, सिंह में (भारतीय समय)।
2027 में गुरु कब राशि बदलता है?
2027 में गुरु का राशि परिवर्तन: 25 जनवरी 2027, रात 12:55 बजे, कर्क में; 26 जून 2027, सुबह 5:44 बजे, सिंह में; 26 नवंबर 2027, रात 7:17 बजे, कन्या में (भारतीय समय)।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गई हैं
यहाँ की हर तिथि और समय उसी पद्धति से निकाला गया है जिससे भारतीय पंचांग ग्रह घटनाएँ देते हैं: निरयण राशिचक्र पर लाहिड़ी अयनांश, ग्रह की दृश्य स्थिति पर, यानी आकाश में वह जहाँ दिखाई देता है। स्तंभन (ग्रह के वक्री या मार्गी होने का क्षण) ग्रह की दृश्य गति से निकाला गया है। समय भारतीय मानक समय में है, मिनट तक।