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ग्रह घटनाएँ · बुध

बुध वक्री और गोचर 2026 और 2027: तिथि और समय

बुध सोच, वाणी, पढ़ाई, लेखन, व्यापार और रोज़मर्रा की बातचीत का कारक है। यहाँ 2026 और 2027 की बुध से जुड़ी हर घटना है, वैदिक ज्योतिष की निरयण राशि पद्धति में, भारतीय समय के साथ।

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।

आकाश में बुध क्या कर रहा है

बुध सूर्य के पास रहता है और आम तौर पर एक राशि में दो से चार सप्ताह रहता है। जब वह किसी राशि की सीमा के पास वक्री होता है तो पिछली राशि में लौटकर फिर से प्रवेश कर सकता है, इसीलिए किसी साल एक ही राशि दो बार दिखती है।

बुध वक्री काल

बुध साल में तीन बार, हर बार लगभग तीन सप्ताह के लिए वक्री होता है। आकाश में कुछ उल्टा नहीं चलता: पृथ्वी से देखने पर बुध पीछे चलता दिखता है क्योंकि पृथ्वी उसे भीतरी कक्षा पर पार करती है। परंपरा वक्री बुध को दोबारा देखने, सुधारने और अधूरे काम पूरे करने का समय मानती है, और बहुत से लोग इस समय योजनाएँ, कागज़ात और संदेश दोबारा जाँचते हैं। ज्योतिष वक्री ग्रह को चेष्टा बल में बलवान भी मानता है, इसलिए यह एक अलग तरह के ध्यान का समय है, जीवन रोकने का नहीं।

छाया काल आकाश का वह हिस्सा है जिसे ग्रह तीन बार पार करता है: वक्री होने से पहले वह उस अंश से गुज़रता है जहाँ वह बाद में मार्गी होगा, और मार्गी होने के बाद वह फिर आगे चलकर उस अंश तक पहुँचता है जहाँ वह वक्री हुआ था।

बुध वक्री 2026

बुध वक्री: 26 फ़रवरी 2026 से 21 मार्च 2026 (कुम्भ)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(कुम्भ के 28°20' पर)
मार्गी होता है
(कुम्भ के 14°16' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
23 दिन

बुध वक्री: 29 जून 2026 से 24 जुलाई 2026 (कर्क से मिथुन)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(कर्क के 2°01' पर)
वक्री गति में कर्क से मिथुन में लौटता है
मार्गी होता है
(मिथुन के 22°05' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
24 दिन

बुध वक्री: 24 अक्टूबर 2026 से 13 नवंबर 2026 (तुला)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(तुला के 26°44' पर)
मार्गी होता है
(तुला के 10°47' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
20 दिन

बुध वक्री 2027

बुध वक्री: 9 फ़रवरी 2027 से 3 मार्च 2027 (कुम्भ से मकर)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(कुम्भ के 11°44' पर)
वक्री गति में कुम्भ से मकर में लौटता है
मार्गी होता है
(मकर के 26°41' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
22 दिन

बुध वक्री: 10 जून 2027 से 5 जुलाई 2027 (मिथुन)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(मिथुन के 12°07' पर)
मार्गी होता है
(मिथुन के 3°13' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
24 दिन

बुध वक्री: 7 अक्टूबर 2027 से 28 अक्टूबर 2027 (तुला से कन्या)

वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(तुला के 10°41' पर)
वक्री गति में तुला से कन्या में लौटता है
मार्गी होता है
(कन्या के 25°04' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
21 दिन

बुध का राशि परिवर्तन (गोचर)

बुध गोचर 2026

1 जनवरी 2026 को बुध धनु राशि में है।

तिथि और समय (IST)प्रवेशगतिकब तक
मकरमार्गी
कुम्भमार्गी
मीनमार्गी
मेषमार्गी
वृषभमार्गी
मिथुनमार्गी
कर्कमार्गी
मिथुनवक्री गति में पीछे
कर्कमार्गी
सिंहमार्गी
कन्यामार्गी
तुलामार्गी
वृश्चिकमार्गी
धनुमार्गी

बुध गोचर 2027

1 जनवरी 2027 को बुध धनु राशि में है।

तिथि और समय (IST)प्रवेशगतिकब तक
मकरमार्गी
कुम्भमार्गी
मकरवक्री गति में पीछे
कुम्भमार्गी
मीनमार्गी
मेषमार्गी
वृषभमार्गी
मिथुनमार्गी
कर्कमार्गी
सिंहमार्गी
कन्यामार्गी
तुलामार्गी
कन्यावक्री गति में पीछे
तुलामार्गी
वृश्चिकमार्गी
धनुमार्गी

आपके लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है

बुध का वक्री होना आपकी पढ़ाई, काम, लेखन या बातचीत में से किसे छूता है, यह इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में बुध किन भावों का स्वामी है और कहाँ बैठा है, और कौन सी दशा चल रही है। जिनके जन्म के समय बुध वक्री था, उन्हें ये समय अक्सर सहज लगते हैं।

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सामान्य प्रश्न

2026 में बुध कब वक्री है?

2026 में बुध 3 बार वक्री होता है: 26 फ़रवरी 2026, दोपहर 12:18 बजे से 21 मार्च 2026, रात 1:03 बजे तक; 29 जून 2026, रात 11:06 बजे से 24 जुलाई 2026, सुबह 4:28 बजे तक; 24 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:43 बजे से 13 नवंबर 2026, रात 9:24 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।

2027 में बुध कब वक्री है?

2027 में बुध 3 बार वक्री होता है: 9 फ़रवरी 2027, रात 11:06 बजे से 3 मार्च 2027, शाम 6:02 बजे तक; 10 जून 2027, रात 11:46 बजे से 5 जुलाई 2027, रात 1:09 बजे तक; 7 अक्टूबर 2027, रात 8:07 बजे से 28 अक्टूबर 2027, रात 7:41 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।

ये तिथियाँ कैसे निकाली गई हैं

यहाँ की हर तिथि और समय उसी पद्धति से निकाला गया है जिससे भारतीय पंचांग ग्रह घटनाएँ देते हैं: निरयण राशिचक्र पर लाहिड़ी अयनांश, ग्रह की दृश्य स्थिति पर, यानी आकाश में वह जहाँ दिखाई देता है। स्तंभन (ग्रह के वक्री या मार्गी होने का क्षण) ग्रह की दृश्य गति से निकाला गया है। समय भारतीय मानक समय में है, मिनट तक।