पहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तकपहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तक
✦आपके शहर का आज का पंचांग →✦हर प्रीमियम प्लान में रत्न-परामर्श शामिल✦किसी दोस्त को रेफ़र करें, आप दोनों को मुफ़्त कुंडली मिलेगी✦आपके शहर का आज का पंचांग →✦हर प्रीमियम प्लान में रत्न-परामर्श शामिल✦किसी दोस्त को रेफ़र करें, आप दोनों को मुफ़्त कुंडली मिलेगी
शनि अनुशासन, कर्म, समय, धैर्य, ज़िम्मेदारी और लगातार प्रयास का कारक है। यहाँ 2026 और 2027 की शनि से जुड़ी हर घटना है, वैदिक ज्योतिष की निरयण राशि पद्धति में, भारतीय समय के साथ।
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।
आकाश में शनि क्या कर रहा है
शनि एक राशि में लगभग ढाई साल रहता है। उसने मार्च 2025 में मीन में प्रवेश किया, जून 2027 में मेष में प्रवेश करता है, अक्टूबर 2027 में वक्री होकर मीन में लौटता है, और फ़रवरी 2028 में मेष में स्थिर होता है। शनि के राशि परिवर्तन से ही हर चंद्र राशि की साढ़े साती और ढैया की तिथियाँ तय होती हैं।
शनि वक्री काल
शनि साल में एक बार लगभग साढ़े चार महीने के लिए वक्री होता है। परंपरा वक्री शनि को ज़िम्मेदारियों पर पीछे मुड़कर देखने और लंबित काम धैर्य से पूरा करने का समय मानती है। वक्री शनि को चेष्टा बल में बलवान माना जाता है।
छाया काल आकाश का वह हिस्सा है जिसे ग्रह तीन बार पार करता है: वक्री होने से पहले वह उस अंश से गुज़रता है जहाँ वह बाद में मार्गी होगा, और मार्गी होने के बाद वह फिर आगे चलकर उस अंश तक पहुँचता है जहाँ वह वक्री हुआ था।
शनि वक्री 2026
शनि वक्री: 27 जुलाई 2026 से 11 दिसंबर 2026 (मीन)
वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(मीन के 20°31' पर)
मार्गी होता है
(मीन के 13°41' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
137 दिन
शनि वक्री 2027
शनि वक्री: 9 अगस्त 2027 से 24 दिसंबर 2027 (मेष से मीन)
वक्री से पहले का छाया काल शुरू
वक्री होता है
(मेष के 3°38' पर)
वक्री गति में मेष से मीन में लौटता है
मार्गी होता है
(मीन के 26°46' पर)
छाया काल समाप्त
वक्री अवधि
136 दिन
शनि का राशि परिवर्तन (गोचर)
शनि गोचर 2026
1 जनवरी 2026 को शनि मीन राशि में है।
2026 में शनि राशि नहीं बदलता।
शनि गोचर 2027
1 जनवरी 2027 को शनि मीन राशि में है।
तिथि और समय (IST)
प्रवेश
गति
कब तक
मेष
मार्गी
मीन
वक्री गति में पीछे
शनि अगली बार 23 फ़रवरी 2028 को मेष में प्रवेश करता है।
आपकी चंद्र राशि से शनि किस भाव में गोचर करता है
पहले कॉलम में अपनी चंद्र राशि खोजें। बाकी हर कॉलम वह राशि है जिसमें ग्रह 2026 और 2027 में रहता है, और खाने में लिखा भाव आपकी चंद्र राशि से उस राशि की गिनती है। तालिका के बाद की सूची बताती है कि परंपरा हर भाव को किस विषय से जोड़ती है।
आपकी चंद्र राशि
शनि मीन में
शनि मेष में
मेष
बारहवाँ
पहला
वृषभ
ग्यारहवाँ
बारहवाँ
मिथुन
दसवाँ
ग्यारहवाँ
कर्क
नौवाँ
दसवाँ
सिंह
आठवाँ
नौवाँ
कन्या
सातवाँ
आठवाँ
तुला
छठा
सातवाँ
वृश्चिक
पाँचवाँ
छठा
धनु
चौथा
पाँचवाँ
मकर
तीसरा
चौथा
कुम्भ
दूसरा
तीसरा
मीन
पहला
दूसरा
चंद्र राशि से हर भाव किन विषयों का है
पहला भाव: स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण
दूसरा भाव: परिवार, वाणी और बचत
तीसरा भाव: प्रयास, साहस, भाई-बहन और संदेश
चौथा भाव: घर, माता और मन की शांति
पाँचवाँ भाव: संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता
छठा भाव: रोज़ का काम, सेहत की आदतें और सेवा
सातवाँ भाव: साझेदारी और विवाह
आठवाँ भाव: साझा धन, बदलाव और शोध
नौवाँ भाव: गुरु, उच्च शिक्षा, आस्था और लंबी यात्राएँ
दसवाँ भाव: करियर और सार्वजनिक पहचान
ग्यारहवाँ भाव: लाभ, मित्र और आशाएँ
बारहवाँ भाव: विश्राम, खर्च, विदेश यात्रा और छोड़ना
आपके लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है
गोचर चंद्र राशि से पढ़ा जाता है: नीचे की तालिका बताती है कि शनि आपकी चंद्र राशि से किस भाव से गुज़रता है। आपके लिए इसका अर्थ आपकी जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और आपकी दशा पर निर्भर है। आपकी साढ़े साती की सटीक तिथियाँ भी इन्हीं राशि परिवर्तनों से निकलती हैं।
2026 में शनि एक बार वक्री होता है: 27 जुलाई 2026, रात 1:27 बजे से 11 दिसंबर 2026, सुबह 5:01 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।
2027 में शनि कब वक्री है?
2027 में शनि एक बार वक्री होता है: 9 अगस्त 2027, रात 11:36 बजे से 24 दिसंबर 2027, सुबह 8:17 बजे तक। समय भारतीय मानक समय में है।
2026 में शनि कब राशि बदलता है?
2026 में शनि राशि नहीं बदलता।
2027 में शनि कब राशि बदलता है?
2027 में शनि का राशि परिवर्तन: 3 जून 2027, सुबह 6:17 बजे, मेष में; 20 अक्टूबर 2027, सुबह 6:18 बजे, मीन में (भारतीय समय)।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गई हैं
यहाँ की हर तिथि और समय उसी पद्धति से निकाला गया है जिससे भारतीय पंचांग ग्रह घटनाएँ देते हैं: निरयण राशिचक्र पर लाहिड़ी अयनांश, ग्रह की दृश्य स्थिति पर, यानी आकाश में वह जहाँ दिखाई देता है। स्तंभन (ग्रह के वक्री या मार्गी होने का क्षण) ग्रह की दृश्य गति से निकाला गया है। समय भारतीय मानक समय में है, मिनट तक।