पहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तकपहली बार आने पर जन्म-कुंडली का विश्लेषण मुफ़्तपूरे भारत में लोगों का भरोसानिजी और सुरक्षित: आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी रहती हैहफ़्ते के किसी भी दिन, असली ज्योतिषी से बात करेंरोज़ का मार्गदर्शन, हर सुबह आप तक
आपके शहर का आज का पंचांग →
त्योहार

बोहाग बिहू 2027

बुधवार, 14 अप्रैल 2027 · 165 दिन बाद

Suryaत्योहारAssam
Delhi · समय IST में

बोहाग बिहू, जिसे रंगाली बिहू यानी आनंद का बिहू भी कहते हैं, असमिया नए साल और वसंत का स्वागत है। इसमें मवेशियों का सम्मान होता है, बड़ों को गामोसा भेंट किया जाता है और शामें बिहू गीतों से गूँजती हैं।

Bohag Bihu की पूजाएं, क्रम से

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ हीं घृणिः सूर्य आदित्यः श्रीं om hreem ghrinih surya adityah shreem

बोहाग बिहू 2027: तिथि और समय

तारीख
बुधवार, 14 अप्रैल 2027
सूर्य का राशि प्रवेश
दोपहर 2:58
सूर्योदय
सुबह 5:57
सूर्यास्त
शाम 6:46

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

बोहाग बिहू 2026: तिथि और समय

तारीख
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
सूर्य का राशि प्रवेश
सुबह 9:02
सूर्योदय
सुबह 5:57
सूर्यास्त
शाम 6:46

कैसे मनाएं

  1. गोरु बिहू पर मवेशियों को नहलाएँ, खिलाएँ और नई रस्सी दें।
  2. मानुह बिहू पर जल्दी स्नान कर नए कपड़े पहनें और बड़ों को प्रणाम करें।
  3. सम्मान के प्रतीक के रूप में बड़ों और अपनों को गामोसा भेंट करें।
  4. मेहमानों के लिए पीठा, लारू और जलपान बनाएँ।
  5. मोहल्ले के बिहू गीत और नृत्य में शामिल हों।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Bohag Bihu आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Bohag Bihu के बाद आने वाले त्योहार

बोहाग बिहू के बारे में

बोहाग बिहू असमिया महीनों चोत और बोहाग के संधिकाल में शुरू होता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। असम के तीन बिहू में यह सबसे उल्लास भरा है, क्योंकि इसी समय खेत नई बुवाई के लिए तैयार होते हैं और पेड़ों पर नई कोंपलें आती हैं। परंपरा से यह सात दिन चलता है, हालाँकि सबसे ज़्यादा रौनक शुरुआती दिनों में रहती है।

पहला दिन गोरु बिहू है, यानी मवेशियों का बिहू, जो चोत महीने का अंतिम दिन होता है। गाय-बैलों को नदी या तालाब पर ले जाकर हल्दी और उड़द के लेप से नहलाया जाता है, दिघलोती और माखियोती की टहनियों से हल्के से छुआ जाता है और उन्हें लौकी और बैंगन के टुकड़े खिलाए जाते हैं, साथ में उनके अच्छे स्वास्थ्य के गीत गाए जाते हैं। शाम को उन्हें नई रस्सियाँ दी जाती हैं। यह उन पशुओं के प्रति कृतज्ञता का दिन है जो किसान के काम में साथ देते हैं।

अगला दिन, बोहाग का पहला दिन, मानुह बिहू है, यानी लोगों का बिहू। सब सुबह जल्दी नहाकर नए कपड़े पहनते हैं और बड़ों को प्रणाम कर उन्हें गामोसा भेंट करते हैं। लाल किनारी वाला यह सफेद हथकरघा कपड़ा असम में सम्मान का प्रतीक है। बड़े छोटों को आशीर्वाद देते हैं और मित्र एक-दूसरे के घर जाकर गामोसा का आदान-प्रदान करते हैं।

घरों में तिल पीठा, घिला पीठा जैसे पीठे, नारियल या तिल के लारू, और चिउड़ा, दही और गुड़ से बना जलपान बनता है। गाँवों और शहरों में युवा ढोल, पेपा और गगना की धुन पर बिहू नृत्य करते हैं, और हुसोरी गाने वाली टोलियाँ घर-घर जाकर परिवार की खुशहाली के गीत गाती हैं। कई दिनों तक बिहू मंचों पर गीत और नृत्य के कार्यक्रम चलते हैं।

बोहाग बिहू सौर कैलेंडर से चलता है, इसलिए यह सूर्य के मेष प्रवेश के साथ शुरू होता है। असम के अलग-अलग इलाकों और समुदायों में रिवाज़ थोड़े अलग होते हैं, और हर गाँव अपने ढंग से उत्सव मनाता है।