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त्योहार

पोइला बैसाख 2027

गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 · 166 दिन बाद

Lakshmiत्योहारWest Bengal
Delhi · समय IST में

पोइला बैशाख, जिसे नोबोबोर्षो भी कहते हैं, बंगाली नए साल की शुरुआत है: भोर में गीत, नए कपड़े, दुकानों में नए बही-खाते और ढेर सारी मिठाइयाँ।

Pohela Boishakh की पूजाएं, क्रम से

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये... Lakshmi mantra
  • ॐ ह्रीं ज्येष्ठायै नमः om hreem jyeshthayai namah
  • ॐ ह्रीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे... Annapurna mantra

पोइला बैसाख 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
सूर्य का राशि प्रवेश
दोपहर 2:58 (14 अप्रैल)
सूर्योदय
सुबह 5:56
सूर्यास्त
शाम 6:46

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

पोइला बैसाख 2026: तिथि और समय

तारीख
बुधवार, 15 अप्रैल 2026
सूर्य का राशि प्रवेश
सुबह 9:02 (14 अप्रैल)
सूर्योदय
सुबह 5:56
सूर्यास्त
शाम 6:46

कैसे मनाएं

  1. भोर में प्रभात फेरी में शामिल हों या नए साल के स्वागत के गीत गाएँ।
  2. नए कपड़े पहनें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
  3. दरवाज़े पर अल्पना बनाएँ और सबको शुभो नोबोबोर्षो कहें।
  4. दुकान हो तो गणेश-लक्ष्मी की पूजा कर नया हालखाता शुरू करें।
  5. परिवार के साथ त्योहार का भोजन और मिठाई बाँटें।

आपकी कुंडली के लिए

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Pohela Boishakh के बाद आने वाले त्योहार

पोइला बैसाख के बारे में

पोइला बैशाख बंगाली कैलेंडर के पहले महीने बैशाख का पहला दिन है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में यह सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के अगले दिन मनाया जाता है। इससे ठीक पहले चैत्र संक्रांति पर पुराना साल विदा होता है, जब कई गाँवों में गाजन और चड़क के उत्सव होते हैं। भारत और बांग्लादेश में हर धर्म के बंगाली इसे नई शुरुआत के दिन के रूप में मनाते हैं।

सुबह की शुरुआत अक्सर प्रभात फेरी से होती है, जिसमें लोग बैशाख के स्वागत के गीत गाते हुए निकलते हैं। घरों की सफाई होती है, दरवाज़े पर अल्पना बनाई जाती है और सब नए कपड़े पहनते हैं। महिलाएँ अक्सर लाल किनारी वाली सफेद साड़ी और पुरुष कुर्ता या पंजाबी पहनते हैं। बच्चे बड़ों के पाँव छूकर आशीर्वाद लेते हैं और हर तरफ शुभो नोबोबोर्षो की शुभकामनाएँ सुनाई देती हैं।

व्यापारियों के लिए यह हालखाता का दिन है, यानी नया बही-खाता। दुकानदार गणेश और लक्ष्मी की पूजा करते हैं, कई लोग कालीघाट या दक्षिणेश्वर जैसे मंदिरों में जाकर, और लाल कपड़े की जिल्द वाले नए खाते पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाकर नए साल का हिसाब शुरू करते हैं। पुराने ग्राहकों को बुलाया जाता है, वे पिछला हिसाब चुकाते हैं और उन्हें मिठाई और नए साल का कैलेंडर दिया जाता है। यह हिसाब-किताब से ज़्यादा दुकान और ग्राहक के बीच के भरोसे का उत्सव है।

भोजन इस दिन का खास हिस्सा है। परिवार साथ बैठकर चावल, मछली, मटन या शाकाहारी व्यंजनों का लंबा दोपहर का भोजन करते हैं और फिर रसगुल्ला, संदेश जैसी मिठाइयाँ खाते हैं। दिन भर सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेले और संगीत की महफ़िलें चलती हैं।

बंगाली कैलेंडर सूर्य की चाल पर चलता है, इसलिए नया साल संक्रांति से तय होता है, और पश्चिम बंगाल में चैत्र संक्रांति के अगले दिन पोइला बैशाख होता है। हर परिवार और समुदाय इसे अपने ढंग से मनाता है।