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त्योहार · Chaitra Purnima

हनुमान जयंती 2027

मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 · 171 दिन बाद

Hanumanत्योहारपूरे भारत में
Delhi · समय IST में

हनुमान जयंती, जिसे हनुमान जन्मोत्सव भी कहते हैं, श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्म का दिन है। इस दिन सुबह से ही मंदिरों में भीड़ होती है और घर-घर हनुमान चालीसा का पाठ होता है।

Hanuman Jayanti की पूजाएं, क्रम से

Hanuman Puja

हनुमान पूजा
Morning, at sunrise

Hanuman is honoured for steady strength and devotion.

क्या चाहिए
  • Hanuman idol or picture
  • Sindoor
  • Red flowers
  • Boondi laddu
  • Ghee diya
विधि
  1. Light the diya before Hanuman.
  2. Offer sindoor, red flowers and laddu.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥manojavam marutatulyavegam jitendriyam buddhimatam varishtham, vatatmajam vanarayuthamukhyam shriramadutam sharanam prapadye
आरती: Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महाबलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Hanuman Puja

हनुमान पूजा
Morning, at sunrise

Hanuman is honoured for steady strength and devotion.

क्या चाहिए
  • Hanuman idol or picture
  • Sindoor
  • Red flowers
  • Boondi laddu
  • Ghee diya
विधि
  1. Light the diya before Hanuman.
  2. Offer sindoor, red flowers and laddu.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥manojavam marutatulyavegam jitendriyam buddhimatam varishtham, vatatmajam vanarayuthamukhyam shriramadutam sharanam prapadye
आरती: Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महाबलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा om namo bhagavate anjaneyaya mahabalaya svaha

हनुमान जयंती 2027: तिथि और समय

तारीख
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
तिथि
चैत्र पूर्णिमा
पूर्णिमा प्रारंभ
20 अप्रैल, सुबह 4:52
पूर्णिमा समाप्त
21 अप्रैल, रात 3:57
सूर्योदय
सुबह 5:51
सूर्यास्त
शाम 6:49

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

हनुमान जयंती 2026: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
तिथि
चैत्र पूर्णिमा
पूर्णिमा प्रारंभ
1 अप्रैल, सुबह 7:07
पूर्णिमा समाप्त
2 अप्रैल, सुबह 7:42
सूर्योदय
सुबह 6:10
सूर्यास्त
शाम 6:39

कैसे मनाएं

  1. सुबह जल्दी हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करें।
  2. सिंदूर, लाल फूल और बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
  3. हनुमान चालीसा का पाठ करें या सुनें।
  4. परिवार की परंपरा हो तो दिन भर व्रत रखें।
  5. शोभायात्रा या भजन में शामिल होकर प्रसाद बाँटें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Hanuman Jayanti आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Hanuman Jayanti के बाद आने वाले त्योहार

हनुमान जयंती के बारे में

उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को, रामनवमी के कुछ दिन बाद मनाई जाती है। हनुमान जी माता अंजना और केसरी के पुत्र हैं। उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि उनके जन्म में पवन देव का आशीर्वाद था। वे बल, बुद्धि और सबसे बढ़कर राम-भक्ति के लिए पूजे जाते हैं। उन्हें चिरंजीवी माना जाता है, इसलिए बहुत से लोग इस दिन को जयंती की जगह जन्मोत्सव कहना पसंद करते हैं।

हनुमान जी की कहानियाँ लगभग हर भारतीय घर में बच्चों को सुनाई जाती हैं: कैसे बचपन में उन्होंने उगते सूरज को पका फल समझकर उसकी ओर छलाँग लगा दी, कैसे समुद्र लाँघकर सीता जी का पता लगाया, और कैसे लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी लाने को पूरा पर्वत ही उठा लाए। माना जाता है कि उनका जन्म सूर्योदय के आसपास हुआ था, इसलिए मंदिरों में पूजा सुबह जल्दी शुरू हो जाती है।

भक्त हनुमान मंदिर जाकर चमेली के तेल या घी में मिला सिंदूर, लाल फूल, पान के पत्तों की माला और बूंदी के लड्डू चढ़ाते हैं। बहुत से लोग कई बार हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और कुछ लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं। कई कस्बों और गाँवों में हनुमान जी की झाँकी के साथ शोभायात्रा निकलती है और मंदिरों में दिन भर भजन-कीर्तन और भंडारा चलता है।

दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यह दिन दूसरे महीनों में मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह मार्गऴि महीने में आता है, कर्नाटक में बहुत से लोग इसे मार्गशीर्ष में मनाते हैं, और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे 41 दिन की दीक्षा के बाद मनाया जाता है। हर परिवार अपने क्षेत्र और मंदिर की परंपरा वाला दिन ही मानता है।

जहाँ यह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, वहाँ दिन पूर्णिमा तिथि से तय होता है, जो ऊपर दी गई है। पूजा का तरीका सरल है, असली बात मन की श्रद्धा है।