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त्योहार · Chaitra Shukla Navami

राम नवमी 2027

गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 · 166 दिन बाद

Ramaत्योहारपूरे भारत में

रामनवमी श्रीराम के जन्म का दिन है, जिनका जन्म अयोध्या में दोपहर के समय हुआ था। इसी दिन चैत्र नवरात्रि पूरी होती है और घर-मंदिरों में रामलला का पालना झुलाया जाता है।

Ram Navami muhuratसुबह 11:04 से दोपहर 1:38 बजे तक

दिन का मध्याह्न काल, नवमी के भीतर। नवमी 14 अप्रैल को दोपहर 3:24 बजे से 15 अप्रैल को दोपहर 1:21 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

Ram Navami की पूजाएं, क्रम से

Rama Puja

राम पूजा
Madhyahna, 11:04 AM to 1:38 PM

The birth of Rama, kept at midday.

क्या चाहिए
  • Rama darbar picture
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Fruit and sweets
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense before the picture.
  2. Offer tulsi, flowers, fruit and sweets.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रश्री राम जय राम जय जय रामshri ram jai ram jai jai ram
आरती: Shri Ramachandra Kripalu

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरं।
पट पीत मानहुं तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Rama Puja

राम पूजा
Madhyahna, 11:04 AM to 1:38 PM

The birth of Rama, kept at midday.

क्या चाहिए
  • Rama darbar picture
  • Tulsi leaves
  • Yellow flowers
  • Fruit and sweets
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense before the picture.
  2. Offer tulsi, flowers, fruit and sweets.
  3. Chant the mantra 108 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रश्री राम जय राम जय जय रामshri ram jai ram jai jai ram
आरती: Shri Ramachandra Kripalu

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरं।
पट पीत मानहुं तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ क्ष्रौं नमो नरसिंहाय om kshraum namo narasimhaya

राम नवमी 2027: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
तिथि
चैत्र शुक्ल नवमी
नवमी प्रारंभ
14 अप्रैल, दोपहर 3:24
नवमी समाप्त
15 अप्रैल, दोपहर 1:22
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:04 से दोपहर 1:38 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 5:56
सूर्यास्त
शाम 6:46

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

राम नवमी 2026: तिथि और समय

तारीख
गुरुवार, 26 मार्च 2026
तिथि
चैत्र शुक्ल नवमी
नवमी प्रारंभ
26 मार्च, सुबह 11:49
नवमी समाप्त
27 मार्च, सुबह 10:07
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:13 से दोपहर 1:40 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:18
सूर्यास्त
शाम 6:35

कैसे मनाएं

  1. सुबह से व्रत रखें, ज़रूरत हो तो फलाहार लें।
  2. घर या मंदिर में रामकथा पढ़ें या सुनें।
  3. दोपहर में रामलला को सजे पालने में रखकर झुलाएँ और बधाई गीत गाएँ।
  4. फूल, तुलसी, पानकम या मिठाई अर्पित करें और प्रसाद बाँटें।
  5. परिवार की परंपरा हो तो कन्या पूजन के साथ नवरात्रि पूरी करें।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Ram Navami आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Ram Navami के बाद आने वाले त्योहार

राम नवमी के बारे में

रामनवमी चैत्र शुक्ल नवमी को आती है, जो चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है। इसी दिन अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्म हुआ था। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, और सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ उनकी कथा भारत के घर-घर में बसी है।

कथा है कि संतान की इच्छा से राजा दशरथ ने यज्ञ कराया। यज्ञ से मिली खीर उन्होंने तीनों रानियों में बाँटी। कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। माना जाता है कि श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा उसी समय होती है।

उत्तर भारत में कई घरों और मंदिरों में नवमी से पहले रामकथा का अखंड पाठ होता है, जो नवमी को पूरा होता है। दोपहर के समय रामलला की छोटी मूर्ति को सजे हुए पालने में रखकर धीरे-धीरे झुलाया जाता है, सोहर और बधाई गीत गाए जाते हैं और फूल, तुलसी और मिठाई अर्पित की जाती है। बहुत से लोग दोपहर की पूजा तक या पूरे दिन व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं। अयोध्या में भारी भीड़ उमड़ती है, श्रद्धालु सरयू में स्नान करते हैं, और कई शहरों में राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झाँकियों के साथ शोभायात्राएँ निकलती हैं।

दक्षिण भारत में यह दिन अपने ढंग से मनाया जाता है। गुड़, काली मिर्च और इलायची से बना पानकम और मसालेदार छाछ यानी नीर मोर भगवान को अर्पित करके आने वालों में बाँटे जाते हैं। तेलंगाना के भद्राचलम और कई दूसरे मंदिरों में इस दिन सीता-राम कल्याणम, यानी सीता और राम का विवाहोत्सव, धूमधाम से होता है।

रामनवमी उस दिन मनाई जाती है जिस दिन दोपहर के समय नवमी तिथि हो, इसलिए ऊपर दिया मध्याह्न मुहूर्त पूजा के लिए अहम है। व्रत और पूजा का तरीका हर परिवार अपनी परंपरा से तय करता है।