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त्योहार · Bhadrapad Krishna Ashtami

कृष्ण जन्माष्टमी 2027

बुधवार, 25 अगस्त 2027 · 298 दिन बाद

Krishnaत्योहारपूरे भारत में

जन्माष्टमी पर घर-घर में लोग व्रत रखते हैं, भजन गाते हैं और आधी रात तक जागकर नन्हे कान्हा के जन्म का स्वागत करते हैं।

Nishita puja muhuratरात 12:00 से 12:45 बजे तक

मध्यरात्रि का समय, अष्टमी के भीतर। अष्टमी 24 अगस्त को रात 8:25 बजे से 25 अगस्त को शाम 7:21 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

Krishna Janmashtami की पूजाएं, क्रम से

Krishna Puja

कृष्ण पूजा
Nishita, 12:00 AM to 12:45 AM

Krishna's birth is kept at midnight, with the fast broken after the puja.

क्या चाहिए
  • Krishna idol or picture
  • Tulsi leaves
  • Butter and mishri
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
विधि
  1. Bathe the idol with panchamrit, then clean water.
  2. Dress it and offer tulsi, yellow flowers, butter and mishri.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥krishnaya vasudevaya haraye paramatmane, pranatah kleshanashaya govindaya namo namah
आरती: Aarti Kunj Bihari Ki

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Krishna Puja

कृष्ण पूजा
Nishita, 12:00 AM to 12:45 AM

Krishna's birth is kept at midnight, with the fast broken after the puja.

क्या चाहिए
  • Krishna idol or picture
  • Tulsi leaves
  • Butter and mishri
  • Yellow flowers
  • Panchamrit
  • Ghee diya
विधि
  1. Bathe the idol with panchamrit, then clean water.
  2. Dress it and offer tulsi, yellow flowers, butter and mishri.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥krishnaya vasudevaya haraye paramatmane, pranatah kleshanashaya govindaya namo namah
आरती: Aarti Kunj Bihari Ki

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा kleem krishnaya govindaya gopijanavallabhaya svaha
  • ॐ क्ष्रौं नमो नरसिंहाय om kshraum namo narasimhaya

कृष्ण जन्माष्टमी 2027: तिथि और समय

तारीख
बुधवार, 25 अगस्त 2027
तिथि
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
अष्टमी प्रारंभ
24 अगस्त, रात 8:25
अष्टमी समाप्त
25 अगस्त, शाम 7:21
निशीथ काल पूजा मुहूर्त
रात 12:00 से 12:45 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 5:55
सूर्यास्त
शाम 6:50

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि और समय

तारीख
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
तिथि
भाद्रपद कृष्ण नवमी
नवमी प्रारंभ
5 सितंबर, रात 12:14
नवमी समाप्त
5 सितंबर, रात 9:54
निशीथ काल पूजा मुहूर्त
रात 11:57 से 12:42 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:00
सूर्यास्त
शाम 6:39

कैसे मनाएं

  1. दिन भर व्रत रखा जाता है, और ज़रूरत हो तो फल व दूध लिया जाता है।
  2. घरों और मंदिरों में झाँकियाँ और लड्डू गोपाल का सजा हुआ पालना तैयार होता है।
  3. शाम भजन-कीर्तन में बीतती है और झूलन में पालना झुलाया जाता है।
  4. आधी रात को पंचामृत से अभिषेक करके माखन-मिश्री और पंजीरी का भोग लगाया जाता है।
  5. रात की पूजा के बाद व्रत खुलता है, और महाराष्ट्र में अगले दिन दही हांडी होती है।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Krishna Janmashtami आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Krishna Janmashtami के बाद आने वाले त्योहार

कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में

श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को मथुरा की उस कारागार में हुआ, जहाँ उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव को देवकी के भाई राजा कंस ने बंदी बना रखा था। कथा है कि उस रात पहरेदार सो गए, दरवाज़े अपने आप खुल गए, और वसुदेव नवजात शिशु को उफनती यमुना पार करके गोकुल ले गए, जहाँ नंद बाबा और यशोदा मैया ने उन्हें पाला। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को, रोहिणी नक्षत्र में, मनाया जाता है।

पूरे देश में भक्त दिन भर व्रत रखते हैं, कुछ लोग केवल फल और दूध लेते हैं, और शाम भजन-कीर्तन में बीतती है। घरों और मंदिरों में कृष्ण के जीवन की झाँकियाँ सजती हैं और लड्डू गोपाल के लिए पालना सजाया जाता है। झूलन में सब बारी-बारी से पालना झुलाते हैं। आधी रात को, जन्म की घड़ी में, शंख बजते हैं, भगवान का पंचामृत से अभिषेक होता है, नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी व तरह-तरह की मिठाइयों का भोग लगता है। इस पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।

मथुरा और वृंदावन में यह उत्सव विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है और मंदिर रात भर भक्तों से भरे रहते हैं। महाराष्ट्र में अगले दिन गोपालकाला होता है, जब युवक मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर टँगी दही हांडी फोड़ते हैं, जो कृष्ण के माखन प्रेम की याद दिलाती है। गुजरात, ओडिशा, बंगाल और दक्षिण भारत में यह दिन अपने गीतों, पकवानों और गोकुलाष्टमी या श्री जयंती जैसे नामों के साथ मनाया जाता है।

तारीख के बारे में एक बात: यह देखा जाता है कि अष्टमी तिथि आधी रात को है या नहीं, और रोहिणी नक्षत्र साथ है या नहीं। स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ इन बातों को थोड़ा अलग ढंग से देखती हैं, इसलिए कुछ वर्षों में दोनों की जन्माष्टमी एक दिन के अंतर पर पड़ती है। दोनों ही दिन उतनी ही श्रद्धा के हैं। परिवार अपनी परंपरा या अपने मंदिर की रीत के अनुसार चलते हैं।