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त्योहार · Bhadrapad Shukla Chaturthi

गणेश चतुर्थी 2027

शनिवार, 4 सितंबर 2027 · 308 दिन बाद

Ganeshaत्योहारपूरे भारत में

गणेश चतुर्थी पर घर-घर और मोहल्ले-मोहल्ले गणपति बप्पा पधारते हैं। दोपहर में उनकी पूजा होती है और डेढ़ दिन से लेकर दस दिन तक वे घर के सबसे प्यारे मेहमान बनकर रहते हैं।

Ganesh Chaturthi muhuratसुबह 11:04 से दोपहर 1:35 बजे तक

दिन का मध्याह्न काल, चतुर्थी के भीतर। चतुर्थी 3 सितंबर को दोपहर 2:20 बजे से 4 सितंबर को दोपहर 12:26 बजे तक है।

Delhi · समय IST में

गणेश उत्सव

4 से 14 सित॰
  1. 4 सित॰गणेश चतुर्थीपूजा सुबह 11:04 से दोपहर 1:35 बजे तक
  2. 14 सित॰अनंत चतुर्दशीविसर्जन

Ganesh Chaturthi की पूजाएं, क्रम से

Ganesha Puja

गणेश पूजा
Madhyahna, 11:04 AM to 1:35 PM

Ganesha is welcomed home at midday, the hour of his birth.

क्या चाहिए
  • Ganesha idol or picture
  • Durva grass
  • Red flowers
  • Modak or laddu
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense in front of Ganesha.
  2. Offer durva grass, red flowers and modak.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha, nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada
आरती: Jai Ganesh Deva

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

Ganesha Puja

गणेश पूजा
Madhyahna, 11:04 AM to 1:35 PM

Ganesha is welcomed home at midday, the hour of his birth.

क्या चाहिए
  • Ganesha idol or picture
  • Durva grass
  • Red flowers
  • Modak or laddu
  • Ghee diya
  • Incense
विधि
  1. Light the diya and incense in front of Ganesha.
  2. Offer durva grass, red flowers and modak.
  3. Chant the mantra 11 times.
  4. Sing the aarti.
मंत्रवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha, nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada
आरती: Jai Ganesh Deva

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

आरती के शुरुआती पद।

अपने इष्ट देव की पूजा भी जोड़ें

कई परिवार त्योहार के दिन अपने इष्ट देव की भी पूजा करते हैं। हर नाम पर विधि, मंत्र और आरती के साथ पूरी जानकारी खुलती है।

इस दिन के और मंत्र

  • ॐ वक्रतुण्डाय हुं om vakratundaya hum

गणेश चतुर्थी 2027: तिथि और समय

तारीख
शनिवार, 4 सितंबर 2027
तिथि
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
चतुर्थी प्रारंभ
3 सितंबर, दोपहर 2:20
चतुर्थी समाप्त
4 सितंबर, दोपहर 12:26
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:04 से दोपहर 1:35 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:00
सूर्यास्त
शाम 6:39

सभी दिन

  1. शनिवार, 4 सितंबर 2027गणेश चतुर्थी
  2. मंगलवार, 14 सितंबर 2027अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन

समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।

दूसरे वर्ष

गणेश चतुर्थी 2026: तिथि और समय

तारीख
सोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथि
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
चतुर्थी प्रारंभ
14 सितंबर, सुबह 7:08
चतुर्थी समाप्त
15 सितंबर, सुबह 7:45
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 बजे तक
सूर्योदय
सुबह 6:05
सूर्यास्त
शाम 6:27

कैसे मनाएं

  1. बप्पा के आने से पहले घर साफ करके उनकी जगह सजाई जाती है।
  2. दोपहर में मूर्ति की स्थापना करके दूर्वा, लाल फूल और मोदक से पूजा होती है।
  3. जब तक बप्पा घर में रहें, सुबह-शाम आरती की जाती है।
  4. कई परिवार इस रात चांद न देखने की परंपरा निभाते हैं।
  5. आखिरी दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन होता है और अगले बरस जल्दी आने की पुकार की जाती है।

आपकी कुंडली के लिए

अपनी जन्म की जानकारी जोड़ें और देखें कि Ganesh Chaturthi आपके जन्म नक्षत्र या जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं।

Ganesh Chaturthi के बाद आने वाले त्योहार

गणेश चतुर्थी के बारे में

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मदिन माना जाता है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और हर नए काम की शुरुआत में सबसे पहले उन्हीं की पूजा होती है। कथा है कि माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने बिठा दिया। शिव जी जब भीतर जाने लगे तो बालक ने उन्हें रोक दिया, और इसी टकराव में बालक का सिर अलग हो गया। बाद में शिव जी ने उसे हाथी का सिर लगाकर नया जीवन दिया और अपने गणों का अधिपति बनाया। तभी से वे गणपति कहलाए।

यह त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है, पर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसकी रौनक सबसे अलग होती है। घरों में मिट्टी की मूर्ति लाई जाती है और शहरों-कस्बों में बड़े सार्वजनिक पंडाल सजते हैं। गणेशोत्सव दस दिन चलता है और अनंत चतुर्दशी को पूरा होता है, लेकिन कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन में ही विसर्जन कर देते हैं।

मुख्य पूजा दोपहर में होती है, क्योंकि माना जाता है कि गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। प्राण प्रतिष्ठा के बाद दूर्वा, लाल फूल और उनका प्रिय मोदक चढ़ाया जाता है। महाराष्ट्र में नारियल और गुड़ भरे उकड़ीचे मोदक घर पर भाप में पकाए जाते हैं, तो दूसरी जगहों पर लड्डू और तरह-तरह की मिठाइयों का भोग लगता है। जब तक बप्पा घर में रहते हैं, सुबह-शाम आरती होती है और रिश्तेदार, पड़ोसी दर्शन के लिए एक-दूसरे के घर आते-जाते हैं।

चतुर्थी की रात चांद न देखने की परंपरा कई परिवारों में है। यह इस दिन से जुड़ी एक पुरानी रीत है, जिसे लोग सहज भाव से निभाते हैं। आखिरी दिन ढोल-ताशों और नाच-गाने के साथ गणपति को विदा किया जाता है और 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' की पुकार गूंजती है। अब बहुत से परिवार मिट्टी की मूर्ति लाकर घर पर ही बाल्टी या कृत्रिम तालाब में विसर्जन करते हैं।

त्योहार उस दिन मनाया जाता है जिस दिन दोपहर के समय चतुर्थी तिथि हो। इसीलिए कभी-कभी यह सामान्य कैलेंडर से एक दिन आगे-पीछे दिख सकता है।