मट्टू पोंगल 2027
शनिवार, 16 जनवरी 2027 · 77 दिन बाद
मट्टू पोंगल उन गाय-बैलों के धन्यवाद का दिन है जो किसान के काम में बराबर के साथी हैं। पशुओं को नहलाया, सजाया और पोंगल खिलाया जाता है, और इसके अगले दिन कानुम पोंगल पर परिवार मिलने-जुलने और घूमने निकलते हैं।
पोंगल के तीन दिन
14 से 16 जन॰Mattu Pongal की पूजाएं, क्रम से
मट्टू पोंगल 2027: तिथि और समय
- तारीख
- शनिवार, 16 जनवरी 2027
- तिथि
- पौष शुक्ल अष्टमी
- अष्टमी प्रारंभ
- 15 जनवरी, दोपहर 2:14
- अष्टमी समाप्त
- 16 जनवरी, दोपहर 1:44
- सूर्योदय
- सुबह 7:14
- सूर्यास्त
- शाम 5:46
सभी दिन
- गुरुवार, 14 जनवरी 2027भोगी
- शुक्रवार, 15 जनवरी 2027थाई पोंगल
- शनिवार, 16 जनवरी 2027मट्टू पोंगल
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं। अपने शहर का समय ऊपर शहर बदलकर देखें।
दूसरे वर्ष
मट्टू पोंगल 2026: तिथि और समय
- तारीख
- गुरुवार, 15 जनवरी 2026
- तिथि
- माघ कृष्ण द्वादशी
- द्वादशी प्रारंभ
- 14 जनवरी, शाम 5:54
- द्वादशी समाप्त
- 15 जनवरी, रात 8:17
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:46
कैसे मनाएं
- सुबह मवेशियों को नहलाएँ और उनके सींग साफ़ करके रंगें।
- उन्हें फूलों की माला, घंटियों, हल्दी और कुमकुम से सजाएँ।
- उन्हें पोंगल, केले, गन्ना और गुड़ खिलाएँ और आरती उतारें।
- पशुओं को काम से आराम दें, और अगला दिन कानुम पोंगल परिवार से मिलने के लिए रखें।
आपकी कुंडली के लिए
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Mattu Pongal के बाद आने वाले त्योहार
मट्टू पोंगल के बारे में
मट्टू पोंगल, पोंगल त्योहार का तीसरा दिन है, जो तमिल महीने थाई के दूसरे दिन आता है। मट्टू का अर्थ है मवेशी। इस दिन किसान परिवार उन गायों और बैलों का सम्मान करते हैं जो खेत जोतते हैं, फसल घर तक ढोते हैं और दूध देते हैं। ज़्यादातर परिवारों के लिए इसके पीछे की बात सीधी और दिल के करीब है: फसल में इन पशुओं का भी उतना ही हिस्सा है, और उन्हें घर के सदस्य की तरह धन्यवाद दिया जाता है।
यह दिन पूरे तमिलनाडु में मनाया जाता है, और आंध्र प्रदेश में संक्रांति के बाद कनुमा के नाम से पशुओं का ऐसा ही दिन आता है। तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में इन्हीं दिनों जल्लीकट्टू, यानी बैलों को काबू करने का पारंपरिक खेल होता है, जिसे देखने गाँवों में बड़ी भीड़ जुटती है। इन्हीं दिनों कई परिवारों में कनु पिडि की परंपरा भी है, जब बहनें पत्तों पर रंगीन चावल रखकर पक्षियों को खिलाती हैं और भाइयों की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
सुबह मवेशियों को तालाब पर ले जाकर या घर पर ही नहलाया जाता है। उनके सींग साफ़ करके चटक रंगों से रंगे जाते हैं और कहीं-कहीं उन पर धातु की टोपियाँ भी चढ़ाई जाती हैं। उन्हें फूलों की मालाओं, घंटियों और मोतियों से सजाया जाता है और माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाया जाता है। परिवार उन्हें पोंगल, केले, गन्ना और गुड़ खिलाता है और उनकी आरती उतारता है। शाम को सजे हुए पशुओं को अक्सर गाँव में घुमाया जाता है, और कई घरों में उस दिन उनसे कोई काम नहीं लिया जाता।
चौथा और आखिरी दिन कानुम पोंगल लोगों का दिन है; कानुम का अर्थ है देखना या मिलने जाना। परिवार रिश्तेदारों के घर जाते हैं, छोटे बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं, और बहुत से लोग घर का बना खाना लेकर समुद्र तट, नदी किनारे या पार्कों में घूमने निकलते हैं। एक व्यावहारिक बात: पोंगल के चारों दिन सौर पंचांग से चलते हैं और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से गिने जाते हैं, और पशुओं से जुड़ी परंपराएँ हर गाँव और परिवार में अलग-अलग होती हैं।
